राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर अगले तीन दिनों में और गहराने की आशंका है और दिवाली तक यह गंभीर स्तर पर पहुंच सकता है। स्थिति को देखते हुए सरकारी और निजी क्षेत्र के संस्थान 24 घंटे प्रदूषण की माप करने के लिए आगे आए हैं। नागरिकों के एक समूह ने प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तमाम उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन के स्तर की सूचना सार्वजनिक करने की अपील की है। साथ ही नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों से दस नवंबर तक घर से ही काम कराने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया है।

प्रदूषण की रोकथाम के कुछ कदम उठाए जाने के बावजूद शुक्रवार को दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ रही। अगले तीन दिनों में शहर के कई इलाकों में इसके सबसे खराब से खतरनाक स्तर तक पहुंचने की आशंका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी का संपूर्ण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) शुक्रवार को 368 दर्ज किया गया, जोकि ‘बहुत खराब’ दर्जे का माना जाता है। दिल्ली व उत्तर प्रदेश की प्रदूषण मापक इकाइयों के मुताबिक, शनिवार से सोमवार के बीच भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब से ‘घातक स्तर’ पर पहुंचने की आशंका है। ‘माई राइट टु ब्रीद’ संस्था के लोगों ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने वायु प्रदूषण पर अंकुश के लिए जीवनशैली में बदलाव लाने का संकल्प लिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त ईपीसीए को पत्र लिखकर शहर में प्रदूषण स्तर पर अंकुश लगाने के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठाने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में उद्योगों से होने वाले प्रदूषण के स्तर की सूचना वेबसाइटों पर और सार्वजनिक रूप से सामने रखी जाए ताकि लोग देख पाएं कि कौन हवा प्रदूषित कर रहा है। कचरे से बिजली बनाने वाले संयंत्र (वेस्ट इंसिनरेटर ) को भी दस नवंबर तक बंद करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से भी वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत बताई गई है।

सीपीसीबी व वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली (सफर) के आंकड़ों के मुताबिक, छोटे धूल कणों (पीएम 2.5 ) का स्तर 210 दर्ज किया गया। यह कण मोटे धूल कणों से पीएम 10 से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। आंकड़े के मुताबिक दिल्ली के चार इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्तर की है जबकि 29 इलाकों में यह ‘बेहद खराब’ दर्ज की गई है। सफर के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में पीएम 10 का स्तर 333 बना हुआ है। सफर का कहना है कि एक्यूआइअगले तीन दिन तक ‘बेहद खराब’ की श्रेणी में बना रहेगा। सफर के मुताबिक, यह तापमान गिरने व हवा की स्थिरता के कारण है क्योंकि पराली जलने की भागीदारी इसमें बहुत कम रह गई है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में नमी का बढ़ना आगे भी जारी रहेगा। सीपीसीबी के मुताबिक, शुक्रवार को पुरवा हवा चली जिसकी रफ्तार पांच से दस किलोमीटर प्रति घंटा रही। तीन नवंबर को इसके बढ़कर 20 किलोमीटर प्रति घंटा होने के आसार हैं व हवा का रुख दक्षिण-पूर्वी रहने की संभावना है। वहीं चार नवंबर को हवा की दिशा बदलेगी और इसके उत्तर-पश्चिमी होने के आसार हैं। आग जलने से उत्तर-पश्चिमी इलाके में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण चार फीसद से बढ़कर 10 फीसद होने की आशंका है।