दिल्ली-एनसीआर में रह रहे जिन लोगों के पास पुराने वाहन हैं उनके लिए मायूस करने वाली खबर है। देश की शीर्ष अदालत ने फैसला किया है कि दिल्ली-एनसीआर में अब 15 वर्ष पुराने पेट्रोल से चलने वाले और 10 वर्ष पुराने डीजल से चलने वाले वाहन नहीं चल सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 अक्टूबर) को मामले पर सुनवाई करते हुए ऐसे वाहनों पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर ऐसे वाहन दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दिखाई देते हैं तो उन्हें जब्त कर लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली में फैल रहे प्रदूषण की समस्या को ‘बहुत विकट’ और ‘भयानक’ बताते हुए शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पेट्रोल से चलने वाले 15 वर्ष पुराने और डीजल से चलने वाले 10 वर्ष पुराने वाहनों की एक सूची केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और परिवहन विभाग की वेबसाइट पर पब्लिश की जाए। जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि इन वाहनों के मालिकों की सुविधा के लिए स्थानीय अखबारों में ‘अर्थपूर्ण विज्ञापन’ प्रकाशित कराए जाएं।

पीठ ने निर्देश दिया कि सीपीसीबी को तुरंत एक सोशल मीडिया अकाउंट बनाना चाहिए, जिसके जरिये नागरिक सीधे शिकायत दर्ज करा सकें और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) को अमल कराने के लिए उत्तरदायी टास्क फोर्स उन शिकायतों पर अमल कर सके। अदालत द्वारा अनिवार्य पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को जीआरएपी के तहत योजना में चित्रित प्रदूषण चरणों के सख्त अनुपालन के बिना पूर्व कदम उठाने की अनुमति दी गई। जीआरएपी का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के इलाकों में वायु प्रदूषण से निपटने का है और इसे वायु गुणवत्ता खराब होने पर तत्काल उपचार कार्रवाई करने के लिए डिजाइन किया गया है।

बता दें कि 7 अप्रैल 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने दिल्ली-एनसीआर में पेट्रोल से चलने वाले 15 वर्ष पुराने और डीजल से चलने वाले 10 वर्ष पुराने वाहनों पर रोक लगा दी थी। जिसके फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी। पीठ ने कहा कि आदेश का पालन नहीं करने पर वाहनों को जब्त किया जाएगा।