सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार से मिड-डे मील में बच्चों को हफ्ते में एक दिन ही अंडे देने पर जवाब तलब किया है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में देश के सूखा प्रभावित इलाकों में बच्चों की पोषण संबंधी जरुरतों को पूरा करने के लिए मिड-डे मील में हफ्ते में 5 दिन अंडा या दूध देने का आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने इस मामले में बिहार सरकार और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने अगले 4 हफ्तों में जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को यह नोटिस शुक्रवार को एनजीओ ‘वेटरंस फोरम फॉर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि नीतीश कुमार सरकार ने मई, 2015 में स्वराज अभियान मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का उल्लंघन किया है। अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के सूखा प्रभावित जिलों में सरकारों से बच्चों की पोषण संबंधी जरुरतों को पूरा करने के लिए हफ्ते में 5 दिन या कम से कम 3 दिन अंडे या दूध या अन्य पोषक पदार्थ देने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, बिहार में बीते 3 सालों से औसत से कम बारिश हुई है। साथ ही राज्य के 23 जिले सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं।

याचिकाकर्ता एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा है कि सूखा प्रभावित होने के बावजूद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। बिहार सरकार ने 20 अक्टूबर, 2017 को अपने सभी जिला प्रोग्राम अधिकारियों को दिए आदेश में बच्चों को हफ्ते में एक दिन ही उबले हुए अंडे या मौसम के अनुसार, फल देने का आदेश दिया था। एनजीओ का कहना है कि उन्होंने प्रशासन से कई बार इस बारे में बात की, लेकिन प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।