चन्द्रप्रकाश के छोटे भाई सूर्य प्रकाश (उम्र 24) का कम उम्र में ही अस्पतालों का चक्कर लगाते-लगाते दम फूलने लगा था, बीमारी थी की पकड़ में आ ही नहीं रही थी। फिर मालूम चला कि सूर्य प्रकाश को दिल की बीमारी है जिससे ह्रदय महज 20 फीसद ही काम कर रहा है। हृदय का मिलना व इलाज का खर्च (90 लाख) दोनों की बूते के बाहर की बात थी। लगा भाई अब नहीं बचेगा। ऐसे में एक दिन अचानक किसी का ह्रदय मिलना व मुफ्त में इलाज किसी ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं था।
यह अकेला परिवार नहीं जो किसी अनजाने व्यक्ति के सर्वोच्च दान (अंगदान) का ऋणी हो गया। इसी तरह का एक अन्य परिवार राहुल के इलाज के लिए भटक रहा था। एम्स के आर्गन रिट्रिवल बैंकिंग आॅर्गेनाइजेशन में पंजीकृत कराके हार्ट के लिए इंतजार करने के सिवा कोई चारा न था। राहुल ने बताया कि मुझे भी किसी अंजान शख्स के हृदय की धड़कनें जिंदा रखे हैं। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे अंगदान से नई जिदंगी मिली है।
अंगदान दाताओं के अनुभव
ब्रेन डेड अनमोल के पिता ने बताया कि वह जिंदगी में मॉडल बनना चाहता था लेकिन उनका अंगदान देकर वे रोल मॉडल बन गए। सुरभी जिंदल की मां ने बताया कि 16 साल की उम्र में बेटी का ब्रेन डेड हो गया लेकिन हमारी लाख कोशिशें भी उसे बचा न सकीं। पर हमने उसके अंगों को मिट्टी में मिलने नहीं दिया। सुकून मिलता है कि यह सोचकर कि हमारी बेटी किसी और के शरीर में अभी भी जिंदा है। इसी तरह मीना देवी ने अपने पति दीपक के अंगों को दान किया। बबलू के भाई ने उसका अंग दान किया। रवि प्रकाश चढ्ढा की पत्नी ने अपने पति के अंगों का दान किया।
देश में अंगदान की काफी जरूरत
तीन साल में देश में अंगदान के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अभी भी देश के 28 राज्यों और 9 केंद्रशासित प्रदेश में से 22 में ही अंगदान शुरू हो पाया है। अंगदान के मामलों में देश की राजधानी दिल्ली बेहतर स्थिति में है वहीं जनसंख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश और बिहार अभी भी पीछे हैं। तीन साल में बिहार में 44 और उत्तर प्रदेश में महज 26 लोगों के ही अंगदान किए गए।
स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में देश में 9046 अंगदान हुए थे जो 2018 में बढ़कर 10387 हो गए हैं। दिल्ली अंगदान के मामले में सबसे आगे है। दिल्ली में 2018 में सबसे ज्यादा 2066 अंग दान किए गए।
यह संख्या 2016 में 1947 और 2017 में 1989 थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन चलने वाले अंग व उत्तक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) राष्ट्रीय स्तर पर अंगदान को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी कानूनी और गैर कानूनी गतिविधियों पर निगाह रखता है।
प्रतिभा शुक्ल, नई दिल्ली
