रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने मंगलवार को बताया कि रामेश्वरम में 27 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के स्मारक के लिए जल्द ही आधारशिला रखी जाएगी। पर्रीकर ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरन बताया कि केंद्र प्रख्यात वैज्ञानिक कलाम के स्मारक के लिए पांच एकड़ भूमि चाहता है लेकिन अभी केवल 1.8 एकड़ जमीन ही उपलब्ध हो पाई है। उन्होंने कहा, ‘हम जो करना चाह रहे हैं उसे तमिलनाडु सरकार पूरा समर्थन दे रही है। फिलहाल हमने तय कर लिया है कि जितनी भी भूमि उपलब्ध है, वहां 27 जुलाई को कलाम के स्मारक के लिए आधारशिला रख दी जाएगी। हम यह करने जा रहे हैं।’ पर्रीकर ने कहा कि स्मारक के लिए डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा चुका है। अब हम अतिरिक्त भूमि के लिए इंतजार भी नहीं कर रहे हैं।
साल 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रहे कलाम के स्मारक का मुद्दा शून्यकाल में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने उठाया। डेरेक ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा है। जिस दिन गुरुओं को श्रद्धासुमन अर्पित किए जाते हैं। जिन्होंने हमें जीवन में अच्छी बातों की सीख दी है। डेरेक ने कहा, लेकिन रामेश्वरम में चेन्नई से करीब 500 मीटर दूर, हमारे महानतम गुरुओं में से एक गुरु चिरनिद्रा में लीन हैं। अगले सप्ताह उन्हें हमसे दूर गए पूरे एक साल हो जाएंगे। जिस जगह पर उन्हें दफनाया गया था, वहां अब तक टिन का एक शेड है, आसपास आवारा कुत्ते घूमते हैं। बहुत गंदगी फैली है। मैं उस जगह का जिक्र कर रहा हूं जहां हमारे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को दफनाया गया था। उन्होंने कहा, ‘केंद्र कहता है कि उसे जमीन नहीं मिल रही है।’ इस पर अन्नाद्रमुक सदस्यों ने आपत्ति जताई। उपसभापति पीजे कुरियन ने सदस्यों को शांत करते हुए कहा कि वे (डेरेक) जो कुछ कह रहे हैं, वह भले ही आपको अच्छा न लगे लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है।
तृणमूल सदस्यों ने कहा कि वे स्मारक के निर्माण में विलंब के लिए केंद्र या राज्य सरकार पर आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि वे चाहते हैं कि जो भी मुद्दा हो उसका शीघ्र समाधान निकले ताकि स्मारक बनाया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल घोषणा की थी कि मिसाइल मैन के रूप में चर्चित कलाम का एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा। यह स्मारक तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के रामेश्वरम में उस जगह पर बनाया जाएगा, जहां कलाम को दफनाया गया था।

