जयपुर। राजस्थान
राजस्थान में इस बार डेंगू और स्वाइन फ्लू के अलावा स्क्रब टाइफस और कांगो बुखार ने स्वास्थ्य महकमे के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। इन बुखारों से पीडितों की संख्या में इजाफा हुआ है। हालांकि कांगो फीवर से पीड़ित कुछ मरीजों के मरने से अब इसकी रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर इंतजाम शुरू किए गए हैं। कांगो फीवर का असर गुजरात से सटे जिलों में ज्यादा होने से चिकित्सा विभाग ने उन इलाकों में डॉक्टरों की अतिरिक्त टीमें भी तैनात कर दी हैं।

स्वास्थ विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक स्क्रब टाइफस के 1300 से ज्यादा मामलों का पता चला है। इनमें अकेले जयपुर में 347, उदयपुर में 300 और अलवर में 100 से ज्यादा मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इसी तरह डेंगू के तीन हजार से ज्यादा, स्वाइन फ्लू, वायरल और अन्य बुखार के सात हजार से भी ज्यादा मरीज पिछले एक महीने में सामने आ चुके हैं। मलेरिया के डेढ़ सौ से ज्यादा मरीजों की पुष्टि जयपुर शहर में ही हो गई है।

निजी अस्पतालों में मरीजों की तादाद तो इससे भी कई गुना ज्यादा है। वहीं प्रदेश के सरकारी और निजी चिकित्सा केंद्रो पर वायरल बुखार से पीड़ितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। सरकार ने डेंगू, स्वाइन फ्लू और मलेरिया को अधिसूचित बीमारियों की सूची में शामिल किया हुआ है। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा लगातार विभाग की बैठकें कर हालात की समीक्षा कर रहे हैं।

क्या है स्क्रब टाइफस

अब तक पहाड़ों की बीमारी समझी जाने वाली स्क्रब टाइफस अब मैदानी इलाकों में भी तेजी से पांव पसार रही है। दरअसल एक हफ्ते के भीतर यदि बीमारी का पता लग जाए तो उसका इलाज किया जा सकता है। वरना कई सारी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यह बीमारी हिमालयी क्षेत्रों शिमला, असम और पश्चिम बंगाल के लोगों में आम पाई जाती है।

डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के बाद पनपने वाले टिक माइक नामक जीवाणु के काटने से फैलती है। इसका असर छह से 12 दिन के बाद दिखाई देने लगता है। जीवाणु के काटने के बाद तेज बुखार के साथ मरीज की आंखें लाल होना, पेट में पानी भर जाना व पेट के ऊपर काले रंग का निशान बन जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। वहीं इस बीमारी में प्लेटलेट्स कम होने के साथ पीलिया के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं।
ऐसे में इस बीमारी के लिए अलग से उपचार की जरूरत होती है। एक हफ्ते के भीतर यदि बीमारी का पता लग जाए तो उसका इलाज किया जा सकता है। वरना कई दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यह मल्टिपल आर्गन डैमेज कर सकती है।

राजीव जैन