कोहरे के कारण रेलवे को अब तक करीब 18 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इन दिनों रोजाना गाड़ियों में बदलाव और देरी के कारण लोगों को भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लोग भी तेजी से आरक्षण टिकटों को रद्द करा रहे हैं। वहीं उत्तरी रेलवे के पीआरओ नीरज शर्मा का कहना है कि एक गाड़ी के रद्द होने से रेलवे को 8 से 13 लाख का घाटा होता है। उनका साफ कहना था कि कोहरे में किसी परिवहन व्यवस्था में कोई पुख्ता व्यवस्था संभव हो पाना मुश्किल है। हवाईयात्रा से लेकर सड़कयात्रा कोहरे की मार से प्रभावित है। फिलहाल रेलवे के पास भी कोहरे का कोई तोड़ नहीं है।
उनका कहना था कि कोहरे में रेलगाड़ियों को चलाने के लिए 1500 फॉग सेल्फ डिवाइस को गाड़ियों में लगाने का काम चल रहा है। इसमें दिल्ली खंड के पास 350 हैं। यह तकनीक भी ड्राइवरों को कोहरे में दृश्यता नहीं प्रदान कर सकती। इससे श्रवण माध्यम से आगे की सिग्नल का पता चल सकता है, जो आगामी सिग्नलों की दूरी के बारे में आॅडियो जारी करता है।
उन्होंने एक तकनीक के बारे में बताया जिसे कैब सिग्नलिंग कहते हैं, जो कोहरे में रेलगाड़ियों के लिए मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इसे भारतीय रेलवे में स्थापित करना मुश्किल है। क्योंकि यहां पर ज्यादातर रेलवे लाइन खुली हैं और उनके ऊपर से पुलिया या अन्य तरह के निर्माण हैं। जबकि कैब सिग्नलिंग में खुलापन होने से और पुलिया होने से इसका सही इस्तेमाल संभव नहीं है, जो इस दुविधा के साथ बहुत महंगा भी है। पिछले साल इन दिनों ट्रेनों के आवागमन में गाड़ियों के प्रभावित होने के बारे में उनका कहना था कि पिछले साल कोहरा देर से आया था और इस साल की तरह अभी जितना कोहरे का प्रभाव है, उतना नहीं था। तब भी कोहरे से पिछले साल भी औसतन 50-60 गाड़ियों पर कोहरे का असर रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल जतन करने के बाद इस बार 60 से 70 फीसद गाड़ियां प्रभावित हैं। उनका कहना था कि हमारे पास जितनी गाड़ियां होती हैं, उनमें से जाने वाली गाड़ी का रेक तैयार करने, गाड़ियों में यात्री सुविधा के लिए पानी, शौचालय की सफाई के पूरे इंतजाम किए जाते हैं। मौसम की मार के दौरान रेलवे अपना अधिकतम देने के लिए तत्पर रहती है।
रेलगाड़ियों की देरी और रद्द होने के सिलसिले के बीच शुक्रवार को भी कोहरे के असर वाली गाड़ियों की संख्या में बहुत कमी नहीं रही। 16 दिसंबर की 8 और 17 दिसंबर की दो गाड़ियों रद्द थीं। ऐसे की शुक्रवार को शाम 5:30 बजे के बाद 42 गाड़ियां देरी से दिल्ली के विभिन्न स्टेशनों पर पहुंचीं और 28 गाड़ियां तय समय से देरी होने के चलते पुनर्निधारित की गर्इं।

