जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भारी बारिश की वजह से पंजाब में भी कई क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद बाढ़ राहत कार्यों की कमान अपने हाथों में ली हुई है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में मुख्यमंत्री खुद ज़मीनी हालात का जायज़ा ले रहे हैं, जबकि पूरी कैबिनेट और प्रशासनिक अमला चौबीसों घंटे मोर्चा संभाले हुए है।

बुधवार को मुख्यमंत्री मान ने गुरदासपुर और पठानकोट के बाढ़ग्रस्त गांवों में पहुंचकर पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उन्हें हर हाल में राहत पहुंचाएगी। उन्होंने अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर व्यक्ति की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

मान सरकार ने बाढ़ राहत कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। राज्य प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह 24×7 ज़मीनी स्तर पर निगरानी बनाए रखे और हर प्रभावित गांव में राहत पहुंचे। पूरी कैबिनेट को ज़िम्मेदारी सौंपी गई है कि वे फील्ड में रहकर हालात पर नजर रखें और सीधा जनता से संवाद बनाए रखें।

निजी हेलीकॉप्टर भी राहत कार्यों में लगाया

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने निजी हेलीकॉप्टर को भी राहत कार्यों के लिए दे दिया है। यह हेलीकॉप्टर गुरदासपुर और पठानकोट जैसे क्षेत्रों में फंसे लोगों को तेजी से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में इस्तेमाल हो रहा है।

बुधवार को जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने भी प्रभावित गांवों का दौरा कर प्रशासन के साथ मिलकर राहत सामग्री बांटी और स्थानीय व्यवस्थाओं की समीक्षा की। 

रावी का पानी कई गांवों तक पहुंचा

रणजीत सागर डैम से छोड़े गए 1,10,000 क्यूसेक पानी के कारण रावी नदी का जलस्तर बढ़ा है, जिससे कई गांवों में पानी पहुंच चुका हैं। इस वजह ससे गुरदासपुर के गांव जग्गोचक टांडा से 70 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया और पठानकोट के गांव तास में फंसे परिवार को निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया गया।

राहत शिविरों में लंंगर की व्यवस्था

सरकार ने राहत शिविरों और लंगर की व्यवस्था भी पुख्ता की है। नरोट जैमल सिंह और तारागढ़ के स्कूलों में लंगर सेवा शुरू की गई है, जबकि कीड़ी खुर्द, कथलौर, ठूठोवाल, बमियाल, बनी लोधी, और फिरोज़पुर कलां सहित कई गांवों में राहत केंद्र संचालित हो रहे हैं। गुरदासपुर के मराड़ा, बाहमणी, गाहलड़ी और गुरुद्वारा श्री टाहली साहिब को राहत शिविरों में बदला गया है, जहां दवाइयों, भोजन और ठहरने की पूरी व्यवस्था की गई है।

नदी-नालों से दूर रहने की अपील

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नदियों-नालों के किनारों से दूर रहें। उन्होंने यह भी कहा कि यह समय राजनीति का नहीं, सेवा का है और मान सरकार ने इस सेवा धर्म को पूरी ताकत और प्रतिबद्धता के साथ निभाया है।