यौनकर्मियों के संगठन उनके समुदाय के अधिकारों का संरक्षण करने के लिए लाए गए विधेयक से खुश नहीं है। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2016 के मौजूदा स्वरूप का इस समुदाय के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है। ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधियों ने ‘ट्रांसजेंडर लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन बताया है। ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर (एआइएनएसडब्लू) की अध्यक्ष कुसुम, नेशनल नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर की महासचिव पी देवी, यौनकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता रचना, सहित कई ने बुधवार को बुलाई प्रेस कान्फ्रेस में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा-यह विधेयक भीख मांगने को अपराध घोषित करता है और इसके लिए जेल का प्रावधान है। साथ ही ‘किसी भी ट्रांसजेंडर व्यक्ति को भीख मांगने के लिए मजबूर करने या प्रलोभन देकर इसमें ढकेलने’ को अपराध बताता है। उन्होंने कहा कि नौकरी के अवसरों की कमी की वजह से कई ट्रांसजेंडर भीख मांगने को मजबूर हैं और यह विधेयक इस पहलू को ध्यान में नहीं रखता है।

यह विधेयक स्वेच्छा से यौनकर्मी के रूप में काम करने को तस्करी से अलग नहीं करता है। एक अन्य यौनकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता रचना ने कहा कि इस विधेयक की वजह से ट्रांसजेंडरों और यौनकर्मियों की जिंदगी पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। एआइएनएसडब्लू की अध्यक्ष कुसुम ने कहा कि स्वेच्छा से यौन कार्य को बतौर आजीविका चलाने वाली महिलाओं को बगैर उनकी मर्जी से उनके ठिकानों पर छापा मारना, उन्हें जिलाबदर कर उन्हें जबरन किसी शिविर में रखने वाले कानून को उचित नहीं ठहराया जा सकता। नेशनल नेटवर्क आॅफ सेक्स वर्कर की महासचिव पी देवी मानव तस्करी, नाबालिग वैश्यावृति या यौन उत्पीड़न, बंधुआ मजदूरी को रोकने और मजदूरों के पुनर्वास के लिए भारतीय दंड संहिता में पहले से कानून है।

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