मां और बेटी के साथ दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किए गए आशु महाराज उर्फ आसिफ मोहम्मद खान पूछताछ के दौरान पुलिस को काफी छका रहे हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने न तो अपना जुर्म कबूल किया और न हीं पुलिस का सहयोग किया। पूछताछ की समयसीमा समाप्त होने के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया और तिहाड़ जेल भेज दिया है। लेकिन अब क्राइम ब्रांच पूरी सच्चाई से अवगत होने के लिए आशु महाराज का नार्को टेस्ट करवा सकती है। साथ ही उनके उपर अपनी पहचान छिपाने को लेकर एक और प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। इसके लिए कानूनी सलाह ली जा रही है। नवभारत टाइम्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच आशु महाराज के खिलाफ अधिक से अधिक सबूत जुटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन आशु महाराज द्वारा किसी तरह का सहयोग नहीं किया जा रहा है। क्राइम ब्रांच का मानना है कि आरोपी महाराज ने अपने आश्रम में ऐसा कोई चिन्ह नहीं लगा रखा था, जिससे उसके धर्म के बारे में पता चल सके। नाम बदलकर वे लोगों को भ्रमित कर रहा था। यदि क्राइम ब्रांच के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचता है, तो नार्को टेस्ट की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा।
गौरतलब है कि गाजियाबाद की रहने वाली एक महिला ने आशु महाराज उर्फ आसिफ खान के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था। अपने आरोप में महिला ने कहा था कि बाबा के आश्रम मं उसके साथ कई सालों तक दुष्कर्म किया गया था। उसकी बेटी के साथ भी यौन उत्पीड़न किया गया था। आरोप दर्ज होने के बाद क्राइम ब्रांच ने आशु महाराज को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जांच के दौरान पता चला कि आशु महाराज का असली नाम आसिफ खान है।
पूछताछ के दौरान आशु महाराज ने बताया कि अंधविश्वास के सहारे लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए उसने अपना नाम बदला। कहा कि, “मुस्लिम धर्मगुरु बनने पर मुझे इतना पैसा नहीं मिलता जितना हिंदू धर्मगुरु बनने पर। इसके लिए मुझे केवल आसिफ से आशु महाराज ही तो बनना था। ऐसा करते ही मेरा धंधा चल निकला। मेरे दरबार में अंधविश्वासी लोग नोटों की थैली लेकर माथा टेकने लगे।” आशु महाराज के पास मिले दस्तावेजों से भी यह पता चला कि उसने अपने पासपोर्ट, आधार और वोटर कार्ड भी आसिफ नाम से ही बनाव रखे थे।
