निर्भय कुमार पांडेय
मंडावली के साकेत ब्लॉक स्थित जिस मकान में मंगल पहले रहता था। उस मकान में भारी संख्या में लोग किराए के कमरों में रहते हैं। साथ ही आस-पड़ोस के मकानों में भी बड़ी संख्या में लोग किराए पर रहते हैं। इनमें से अधिकतर लोग या तो रिक्शा चालक हैं या फिर मजदूरी करते हैं। गुरुवार को कई ऐसे लोग मिले, जिन्होंने बताया कि वह 20-25 साल से भी अधिक समय से मंडावली में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास दिल्ली का राशन कार्ड तक नहीं है। कई ऐसे भी मिले, जिनके पास मतदाता पहचान पत्र तो है और वे हर चुनाव में मतदान भी करते हैं। पर राशन कार्ड नहीं होने की वजह से ऐसे जरूरतमंद लोगों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सस्ते दरों पर अनाज नहीं मिल रहा। इस संबंध में मकान मालिक भरत सिंह का कहना है कि ये लोग लंबे समय तक मकान में नहीं रहते। इस कारण इनका राशन कार्ड नहीं बन पाता है। वहीं, रूप सिंह ने बताया कि मालिक लिखकर नहीं देते। इस कारण राशन कार्ड नहीं बनता। वहीं, राम लड़ते ने कहा कि उनके पास आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र है। बावजूद इसके उनका राशन कार्ड नहीं बना कई बार वह स्थानीय कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं।
किसी को हमारी चिंता नहीं
वहीं, साकेत ब्लॉक में रहने वाले मिथलेश का आरोप है कि सभी सरकारें बड़े-बड़े दावे करती हैं कि किराएदारों को भी सभी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। पर इलाके में हजारों की संख्या में लोग रह रहे हैं, लेकिन किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ इन्हें नहीं मिल रहा है। चुनाव के दौरान हर बार दावा किया जाता है कि किराएदारों को भी सस्ते दर पर अनाज मुहैया कराया जाएगा, लेकिन चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि सुध लेने के लिए भी नहीं आते। यही कारण है कि तीन बच्चियों की मौत भूख से हो जाती है।
मंगल घर से गायब रहता था
साकेत ब्लॉक में रहने वाले विनोद मेहरा ने बताया कि भले ही हम रिक्शा चलाकर जीवनयापन करते हैं। पर किसी को भूखे पेट मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। उन्होंने बताया कि मंगल अक्सर शराब के नशे में चार-पांच दिनों तक लापता रहता था। पर आस-पड़ोस के लोग उसकी पत्नी और बच्चियों को भूखे नहीं रहने देते थे। जब लोगों को पता चलता था कि बच्चे भूखे हैं तो खाने के लिए कुछ न कुछ दे देते थे। यही कारण है कि यदि मंगल अपने जानकार के कमरे में नहीं गया होता तो शायद आज तीनों बच्चियां जीवित होती।
इलाके में मातम का माहौल
इस घटना के बाद मंडावली के साकेत ब्लॉक और तालाब चौक में मामत का माहौल बना है। हर कोई इस घटना को लेकर बातचीत करते हुए मिला। साकेत ब्लॉक में रहने वाले लोगों का कहना था कि भले ही मानसिक तौर पर बीमार थी, लेकिन बच्चों का काफी ख्याल रखती थी। तीन-चार साल पहले यह परिवार काफी खुश रहता था। मंगल रेहड़ी पर पराठे बेचा करता था, जो कि इलाके में काफी प्रसिद्ध था। पर शराब की वजह से उसने यह काम छोड़ दिया। वहीं, तलाब चौक में रहने वाले लोगों का कहना था कि उन्हें भरोसा हीं नहीं हो रहा है कि तीन दिन पहले एक परिवार तीन बच्चियों के साथ रहने के लिए आता है और बाद में भूख से तीन बच्चियों की मौत हो जाती है। इसकी भनक तक किसी को नहीं लगती कि बच्चियां तीन दिनों से भूखी प्यासी हैं।
