कश्मीर में मस्जिदों और इमामों की जानकारी जुटाने की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और कांग्रेस ने निंदा की है। दोनों राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि यह मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यदि धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी जुटाना जरूरी है तो इसकी शुरुआत देश भर के मंदिरों से होनी चाहिए।
मुफ्ती ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मस्जिदों के लिए जारी किया गया ताजा आदेश हमारे धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी है। अगर उन्हें ऐसा करना ही है, तो उन्हें अन्य धर्मों से शुरुआत करनी चाहिए। उन्हें मंदिरों में पुजारियों के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि ‘शूद्र’ किस मंदिर में जा सकते हैं और ब्राह्मण किस मंदिर में जा सकते हैं।’’
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पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारियों को मंदिरों में प्रवेश के लिए भुगतान की जाने वाली धनराशि के बारे में भी जानकारी हासिल करनी चाहिए।
महबूबा ने कहा, ‘‘पुलिस के पास जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों की संख्या और उनकी जमीन का रिकॉर्ड पहले से ही मौजूद है, लेकिन अब मौलवियों, इमामों का विवरण, उनकी तस्वीरें, आधार कार्ड मांगना और इस तरह की जानकारी जुटाना जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों को डराने और उन्हें उनके मजहब से दूर रखने की कोशिश है।’’
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मस्जिदों के इमाम और प्रबंधन समितियां इस तरह से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया से डरे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘पांच पन्नों का प्रोफार्मा इस तरह बनाया गया है कि ऐसा लगता है कि वे इमाम, मौलवी, शिक्षक या मस्जिद समितियों के सदस्य नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) हैं।’
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पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को गुरुद्वारों और गिरजाघरों से भी इसी तरह की जानकारी जुटाने की चुनौती दी। महबूबा ने कहा कि उन्हें डर है कि सरकार देश भर की मस्जिदों से भी इस तरह की जानकारी जुटा सकती है।
पीडीपी प्रमुख ने कहा, ‘‘पहले उन्होंने वक्फ की संपत्तियों पर हाथ डाला और अब वे उन मस्जिदों पर भी हाथ डालना चाहते हैं जो वक्फ की संपत्ति नहीं हैं। वे अब अलग-अलग मज़हबी फ़िरक़ों (संप्रदायों) की जानकारी भी मांग रहे हैं।’’
धर्मनिरपेक्ष नींव को कमजोर करने वाला कदम- शाहनवाज
कांग्रेस के शाहनवाज चौधरी ने कहा कि यह कदम देश की धर्मनिरपेक्ष नींव को कमजोर करता है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव और पुंछ कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष चौधरी ने कहा, ‘किसी पूरे धर्म या समुदाय पर सामूहिक रूप से संदेह करना न केवल असंवैधानिक है बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने के लिए भी बेहद खतरनाक है।’
चौधरी ने कहा कि किसी भी पूरे समुदाय को शक की निगाह से देखना और उसे अलग-थलग करना अविश्वास और बंटवारे को जन्म देता है, जो आगे चलकर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पिछले साल ‘सफेदपोश’ आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बाद कश्मीर में मस्जिदों, मदरसों और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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