बिहार में चमकी बुखार किसी महामारी की तरह अब तक करीब 150 मासूम बच्चों की जान ले चुका है। डॉक्टर कहते हैं कि जब चमकी से पीड़ित मरीज अस्पताल आता है, तब हमारे पास उसकी जान बचाने के लिए सिर्फ 120 मिनट होते है। यह बुखार काफी तेजी से शरीर पर असर करता है। इसमें पहले मरीज का शरीर तपने लगता है, जिसके बाद वह बेहोशी की अवस्था में चला जाता है। ऐसे में डॉक्टरों के पास मरीज की जान बचाने के लिए सिर्फ 2 घंटे ही होते हैं।

केंद्र सरकार ने भेजी 5 डॉक्टरों की टीम: महामारी के शिकार मुजफ्फरपुर में डॉक्टरों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए 5 डॉक्टरों की टीम भेजी है। आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही इस महामारी से 117 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालांकि, सरकारी आंकड़े इससे काफी कम बताए जा रहे हैं।

ग्राउंड लेवल पर जाकर टीमें कर रही हैं केस की निगरानी: बिहार सरकार भी पूरे दमखम के साथ इस महामारी से लड़ने का प्रयास कर रही है। सरकार ने प्रभावित इलाकों मीनापुर, बोचहा, कांटी और मोतीपुर आदि में डॉक्टरों की भेजी है। सभी प्रभावित जिलों में एंबुलेंस चलाई जा रही हैं। वहीं, एक्सपर्ट टीम मोबाइल मेडिकल सिस्टम के साथ कैंप लगाकर जहां भी बच्चों को बुखार हुआ है, उनका इलाज कर रही है। ग्राउंड लेवल पर टीमें जाकर केस की निगरानी कर रही हैं, क्योंकि अगर समय रहते मरीज का पता चल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में 24 जून को सुनवाई: इस मामले मनोहर प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें आग्रह किया गया है कि महामारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार को दिशा निर्देश दिए जाएं। कोर्ट इस मामले में सुनवाई 24 जून को करेगी।