वायुसेना के पास हल्के लड़ाकू विमानों की कमी को लेकर संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने चिंता जताई है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता वाली कमेटी ने संसद में जमा की गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह स्थिति देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की वायुसेना के पास पर्याप्त संख्या में लाइट कॉम्बैट एअरक्राफ्ट (एलएसी) यानी हल्के लड़ाकू विमान नहीं हैं। संसदीय समिति की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब केंद्र की राजग सरकार अत्याधुनिक लड़ाकू विमान रफाल के सौदे को लेकर विपक्ष के हमलों से घिरी हुई है।
लोक लेखा समिति ने रक्षा मंत्रालय से तत्काल इस दिशा में जरूरी कदम उठाने को कहा है। पीएसी में भाजपा और कांग्रेस के अलावा तृणमूल कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजू जनता दल, शिव सेना के प्रतिनिधियों के तौर पर लोकसभा और राज्यसभा के कुल 22 सदस्य शामिल हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वायु सेना अपनी जरूरतों के लिए फिलहाल अल्पकालीन उपायों पर निर्भर है। यह स्थिति ठीक नहीं है और जल्द इसका समाधान होना चाहिए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वायुसेना की जरूरतों को देखते हुए तत्काल हल्के लड़ाकू विमानों की परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए। इस श्रेणी के विमानों का आयात न करना पड़े और इसे देश में ही बनाया जाएगा- इसके लिए सरकार लंबी अवधि की कार्ययोजना तैयार करे। पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में मौजूदा हालात से निराशा जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन दशकों से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद रक्षा मंत्रालय की ऐअरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजंसी जरूरत के मुताबिक स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान विकसित नहीं कर पाई है।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है जुलाई 2018 तक भारतीय वायुसेना को 200 तेजस लड़ाकू जेट और 20 ट्रेनर वायुयानों की जरूरत थी, लेकिन उसे सिर्फ नौ तेजस मिल पाए। पीएसी ने ‘डिजाइंस डेवलपमेंट, मैन्यूफैक्चर एंड इंडक्शन ऑफ लाइट कॉम्बैट एअरक्राफ्ट’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुपरसोनिक फाइटर जेट को विकसित करने और वायुसेना में शामिल करने में बहुत ज्यादा देरी हो रही है। भारतीय वायुसेना को मिग-बीआइएस, मिग-29, मिराज-2000 और जैगुआर जैसे लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करना है, जिस पर 20,037 करोड़ रुपए की लागत आएगी। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एलसीए परियोजना का मकसद पुराने हो चुके मिग-21 और मिग-27 की भरपाई करना था। तेजस एक इंजन वाला लड़ाकू विमान है। सरकार ने 1983 में एलसीए के विकास और निर्माण का कार्यक्रम शुरू किया था। भारतीय वायु सेना के लिए 42 स्क्वाड्रंस को मंजूर किया गया, लेकिन फिलहाल सिर्फ 35 स्क्वाड्रंस ही काम कर रहे हैं। समिति ने कहा कि मिग-21 और मिग-27 के स्क्वाड्रन अगले 10 वर्ष में रिटायर हो जाएंगे।

