खतरनाक हद तक बढ़ चुके प्रदूषण में कमी लाने की दिशा में एक अंतरिम उपाय करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शुक्रवार को आदेश दिया कि दिल्ली में डीजल से चलने वाले वाहनों का 6 जनवरी तक कोई पंजीकरण नहीं किया जाएगा। साथ ही डीजल से चलने वाले 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों के पंजीकरण का नवीनीकरण भी नहीं किया जाएगा। एनजीटी ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार की ओर से वाहनों के लिए शुरू की जाने वाली सम-विषम योजना पर भी सवाल उठा दिया। अधिकरण ने कहा कि इससे मकसद हल नहीं होगा।
एनजीटी प्रमुख न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाले एक पीठ ने कहा कि दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में वाहन से होने वाले प्रदूषण का गंभीर योगदान देखते हुए यह अहम है कि सरकार को एक गंभीर नजरिया अपनाना चाहिए। उसे फैसला लेना चाहिए कि क्या दिल्ली में किसी डीजल वाहन, नए या पुराने, का पंजीकरण होना चाहिए।
पीठ ने कहा- एक अंतरिम उपाय के तौर पर और मामले में सभी पक्षों की सुनवाई होने तक हम निर्देश देते हैं कि 10 साल से ज्यादा पुराने हो चुके और नए डीजल वाहनों का पंजीकरण दिल्ली में नहीं किया जाएगा। अधिकरण ने केंद्र एवं राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे अपने विभागों के लिए भी कोई डीजल वाहन न खरीदें। दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर शंकाएं जाहिर करते हुए एनजीटी ने कहा कि वाहनों के लिए सम-विषम योजना लोगों को दो कारें खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। सात अप्रैल को एनजीटी ने कहा था कि 10 साल से ज्यादा पुराने वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में चलाने की इजाजत नहीं दी जाएगी ।
दिल्ली में वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत डीजल को बताते हुए एनजीटी ने कहा था कि हालात इतने खतरनाक हैं कि लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के कारण उन्हें दिल्ली छोड़कर चले जाने तक की सलाह दी गई है। इससे पहले पिछले साल नवंबर में पीठ ने 15 साल से ज्यादा पुराने सभी वाहनों पर पाबंदी लगा दी थी और कहा था कि उन्हें दिल्ली की सड़कों पर नहीं चलने दिया जाएगा।
