16 December Rape Case Verdict: दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप मामले में सोमवार (नौ जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले के तीन दोषियों की पुर्नविचार याचिका खारिज कर दी। यानी कोर्ट ने दोषियों की फांसी की सजा का फैसला बरकरार रखा। कोर्ट का कहना है कि गुनहगारों को इस मामले में फांसी की सजा सही दी गई है।
निर्भया मामले में यह फैसला प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने सुनाया। 29 वर्षीय के.मुकेश, 22 वर्षीय पवन गुप्ता और विनय शर्मा फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। इन्हीं तीनों ने पुर्नविचार याचिका दी थी।
आपको बता दें कि इस मामले में कुल छह दोषी थे, जिसमें चौथे अक्षय कुमार सिंह ने कोर्ट के पिछले फैसले के खिलाफ पुर्नविचार याचिका नहीं दी थी। हालांकि, उसके वकील ने कहा है कि वह जल्द ही पुर्नविचार याचिका दाखिल करेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने पिछले साल इस मामले में चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, पांचवें ने खुदकुशी कर ली थी, जबकि छठा दोषी नाबालिग था। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे सुधार गृह में तीन साल रखने के बाद रिहा कर दिया था।

Highlights
सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की पुर्नविचार याचिका खारिज कर दी। यानी कोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा है।
गैंगरेप का अन्य दोषी पवन दिल्ली में फल बेचता था। वह भी तिहाड़ में है और वहां रहकर स्नातक की पढ़ाई कर रहा है, जबकि अक्षय दिल्ली पढ़ाई छोड़कर आया था। राम से उसकी मुलाकात हुई। दोस्ती गहरी हुई, जिसके बाद उसने अन्य दरिंदों के साथ वारदात को अंजाम दिया।
फिटनेस ट्रेनर विनय शर्मा भी इस मामले में दोषी है। जेल के भीतर उसने पिछले साल खुदकुशी का प्रयास किया था, मगर वह बच गया था। वहीं, मुकेश सिंह बस की साफ-सफाई करता था। वह इस मामले को लेकर तिहाड़ जेल में बंद है।
राम सिंह बस चालक था। निर्भया संग जिस बस में गैंगरेप हुआ था, उसे सिंह ही चला रहा था। वही मुख्य आरोपी था। गैंगरेप के अलावा उसने निर्भया व उसके दोस्त को लोहे की सरिया से बेरहमी से पीटा था।
बेटी के साथ इतना घिनौना अपराध हुआ कि उसकी जान ही चली गई। देश को पता है कि हमारी बच्ची ने क्या झेला। सब कुछ शीशे जैसा साफ है, फिर भी न्याय में इतने साल लग गए।
निर्भया की मां ने इससे पहले कहा था, "अभी तक कुछ भी नहीं बदला है। रोजाना उसी तरह की घटनाएं देश में हो रही हैं। देश की राजधानी दिल्ली सरीखे शहरों में भी लड़कियां सुरक्षित नहीं है। भारी-भरकंप विरोध प्रदर्शन के बाद भी ये घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बड़ी नाकामी इसमें हमारी न्याय व्यवस्था की है।"
दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय मिलने की कामना की। उन्होंने सोमवार को ट्वीट कर कहा, "ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि निर्भया को न्याय मिले। छह साल से उसकी मां इसके लिए लड़ रही हैं। न्याय में देरी हो सकती है, मगर उसे झुठलाया नहीं जा सकता। न्याय में हर मिनट की देरी बलात्कारियों को बढ़ावा देती है। यह देश की न जाने कितनी निर्भयाओं के लिए तमाचे जैसा है।"
वसंत विहार गैंगरेप की पीड़िता की मां आशा देवी ने कोर्ट के फैसले से पहले इस बारे में सोमवार (नौ जुलाई) को पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा, 'घटना को छह साल हो गए। रोजाना वैसे ही घटनाएं हो रही हैं। हमारी व्यवस्था विफल नजर आ रही है। हमें पूरा यकीन है कि फैसला हमारे पक्ष में होगा और हमें न्याय मिलेगा।'
पीड़िता के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, "मेरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील है कि वह महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाएं।"
निर्भया गैंगरेप मामले में कुछ छह दरिंदे थे। तीन पर कोर्ट में आज फैसला आएगा। एक अन्य पुर्नविचार याचिका डालने की तैयारी कर रहा है। वहीं, दोषियों में से पांचवें राम सिंह ने दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी, जबकि छठा नाबालिग था। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उसे दोषी करार दिया था। सुधार गृह से तीन साल बाद उसे रिहा कर दिया गया था।
16 दिसंबर 2012 को वसंत विहार इलाके से 23 वर्षीय पैरमेडिकल की छात्रा को दरिंदों से बस में बिठाया था। चलती बस में तब पीड़िता के साथ छह लोगों ने बलात्कार किया। यही नहीं, पीड़िता के शरीर पर तब बुरी तरह से चोट भी पहुंचाई गई थी। वारदात के बाद वे उसे फेंक कर फरार हो गए थे। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया था, मगर 29 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ दिया था।