नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के मौत मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। घटना को लेकर ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह घटना पर्यावरण अनुपालन के गंभीर मुद्दे उठाती है और कानून के उल्लंघन का संकेत देती है।
बता दें कि नोएडा 150 के हाईटेक सोसाइटी के पास खाली पड़े कामर्शियल जमीन में पानी में डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद यूपी सरकार ने मामले पर कार्रवाई करते हुए नोएडा सीईओ को हटा दिया।
मॉल के लिए आवंटित हुई थी वह जमीन
एनजीटी के रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित भूमि मूल रूप से एक निजी मॉल परियोजना के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन लगभग एक दशक में आसपास की आवासीय सोसाइटियों से निकलने वाले बारिश के पानी और नाली का पानी भरने के कारण यह एक तालाब की तरह बन गई थी।
डीएम समेत कई विभाग बने प्रतिवादी
एनजीटी ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (पर्यावरण) और गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को प्रतिवादी बनाया है।
एक हफ्ते में देना होगा जवाब
एनजीटी ने इन सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और उनसे एक हफ्ते के भीतर हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या हुआ था हादसा?
बता दें कि 16-17 जनवरी की दरमियानी रात युवराज अपनी एसयूवी से गुरुग्राम के ऑफिस से नोएडा स्थित अपने घर वापस आ रहा था, वह अपने घर के करीब पहुंचा ही थी कि उसकी कार घने कोहरे कारण एक चारदीवारी से टकराते हुए सड़क के किनारे बने गहरे गड्ढे में गिर गई। यह गड्ढा उसी कामर्शियल जमीन पर बेसमेंट के लिए खुदाई के कारण बना था और उसमें कई सालों से बने नालों से पानी रिस कर भर गया था। इसी पानी में युवक की डूबकर मौत हो गई। आगे पढ़िए युवराज मेहता के मौत मामले में एक बिल्डर गिरफ्तार, तीन दिन बाद निकाली गई इंजीनियर की डूबी कार
