दीपक रस्तोगी
नकदी संकट नहीं संभल रहा तो वित्त मंत्रालय ने अब हाथ खड़े कर दिए हैं। मंत्रालय ने रिजर्व बैंक को नोट भेजकर कहा है, ‘बैंकों और एटीएम से कितनी मात्रा में कितने नोट जारी किए जाएंगे, इस बारे में आरबीआइ को समय-समय पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।’ इसके बाद से रिजर्व बैंक ने बैंकों को भेजे पत्र में कहा है, ‘वे अब से सिर्फ रिजर्व बैंक से मिले निर्देशों का अनुपालन करें। सोशल साइट का इस्तेमाल कर कोई सरकारी एजंसी कोई ऐलान करती है तो उसे न मानें।’ यह परिपत्र वित्त मंत्रालय को भी भेजा गया है। इसके साथ ही विमुद्रीकरण के बाद गठित वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिवों की टीमें शुक्रवार से भंग कर दी गर्इं। आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद से बैंकिंग प्रणाली का कामकाज एक तरह से वित्त मंत्रालय के अधिकारी संभाल रहे थे। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास के नेतृत्व में संयुक्त सचिवों की आठ टीमें काम कर रही थीं। ये टीमें रोजमर्रा के आधार पर नीतियां बना रही थीं। वित्त मंत्रालय या वित्त मंत्री जो घोषणाएं करते थे, रिजर्व बैंक बाद में उनके आधार पर नोटिफिकेशन जारी करता रहा। अब जब बैंकों में तरलता बढ़ गई है। नकदी संकट संभल नहीं रहा है। बैंक उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ रही हैं, ऐसे में वित्त मंत्रालय की टीमें भंग कर दी गई हैं।
अब वित्त मंत्रालय नोटों की छपाई में सहयोग की भूमिका में आ गया है। नोट छापने के देवास और नासिक के मुद्रणालयों में छपाई का काम संभालने के लिए डेपुटेशन पर भेजे गए वित्त मंत्रालय के दो अधिकारियों को अब रिजर्व बैंक को रिपोर्ट करने को कहा गया है। इन मुद्राणालयों में पांच सौ और एक सौ रुपए के नए नोट छापे जा रहे हैं। वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक को नोट भेजा है। इसमें कहा गया है, ‘बैंक खातों से नकदी की निकासी को लेकर समय-समय पर रिजर्व बैंक जो निर्देश देगा, वही मान्य होगा। एटीएम से किस तरह से नोट निकाले जा सकेंगे, यह रिजर्व बैंक ही स्पष्ट करेगा।’ आठ नवंबर को विमुद्रीकरण के ऐलान के बाद से वित्त मंत्रालय ने 170 बार से अधिक अपने निर्देशों में संशोधन किया है। रिजर्व बैंक अब तक 14 बार अपने दिशा-निर्देशों को संशोधित कर चुका है। ऐसे में खाताधारकों और बैंकों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
एक और दो दिसंबर को देश भर में बैंकों और एटीएम के सामने वेतन निकालने के लिए लोग खड़े रहे। इसका ब्योरा देते हुए अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआइबीईए) और अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआइबीओए) ने वित्त मंत्रालय को कड़ी चिट्ठी लिखी। इन संगठनों का कहना था कि जब तक रिजर्व बैंक नकदी की आपूर्ति के लिए उपाय नहीं करेगा, संकट बन रहेगा। एआइबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम के मुताबिक, ‘बैंकों के चेस्ट में किस तरह की व्यवस्था होनी है, एटीएम की प्रणाली को नए नोटों के मुताबिक कैसे दुरुस्त करना है, यह देखने का काम रिजर्व बैंक का है।’ एआइबीओए के महासचिव एस नागराजन के मुताबिक, ‘बैंकों की कई शाखाओं में नई करेंसी पहुंची ही नहीं है। खाताधारक दो हजार रुपए के नोट नहीं लेना चाहते, क्योंकि खुल्ले नहीं मिल रहे हैं। बैंकों के सामने नाराज उपभोक्ताओं का सामना करने की मजबूरी है। काम का दबाव भी है। ऐसे में बैंकों में कामकाज का ढांचा चरमरा रहा है।’ नागराजन के मुताबिक रिजर्व बैंक की भूमिका व्यवस्थापक की भी है। उसे ही व्यवस्था करनी होगी कि सभी जगह नोट पहुंचे। भले ही देश में नोटों की राशनिंग आरबीआइ करता रहे।
इन दोनों संगठनों के पत्र पर हरकत में आए वित्त मंत्रालय ने आरबीआइ को लिखा और आरबीआइ ने बैंकों को। रिजर्व बैंक के सहायक सलाहकार अजीत प्रसाद के अनुसार,‘सोशल मीडिया साइट फेसबुक और ट्विटर पर सरकारी एजंसियों ने जो निर्देश या संदेश जारी किए, उनसे ज्यादा भ्रम फैला। बैंकों को कह दिया गया है कि आरबीआइ के ई-मेल जाए को ही सटीक माना जाए। उसके मुताबिक ही व्यवस्था की जाए।’ रिजर्व बैंक ने आठ नवंबर के बाद से चली आ रही नकदी की राशनिंग व्यवस्था में बदलाव नहीं किया है। नए नोटों की आपूर्ति सब जगह होने पर इस व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा।

