सुप्रीम कोर्ट ने देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर मंगलवार को गहरी चिंताई जताई। अदालत ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से कहा कि देश में किसी भी मामले में यौन उत्पीड़न की घटना की पीड़िताओं की तस्वीरें किसी भी रूप में प्रकाशित या प्रसारित-प्रदर्शित नहीं की जाए। इस मामले की सुनवाई कर रहे तीन सदस्यीय पीठ में नवनियुक्त जज न्यायमूर्ति केएम जोसेफ शामिल हैं। उनके अलावा इस पीठ में न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता शामिल हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह देश भर में आश्रय गृहों में नाबालिगों के यौन शोषण की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले प्रस्तावित कदमों से उसे अवगत कराए। जजों ने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर छह घंटे में एक महिला बलात्कार की शिकार हो रही है। 2016 में भारत में 38,947 महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ।

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह सामूहिक बलात्कार कांड में अदालत स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। इससे पहले अदालत ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार के जवाब तलब किया था। मंगलवार को इस मामले के ताजा तथ्यों के संदर्भ में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यौन उत्पीड़न से पीड़ित नाबालिगों के इंटरव्यू करने पर तीखी आपत्ति व्यक्त की। अदालत ने चेताया कि इसका नाबालिगों के दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है। जजों ने कहा कि बाल यौन उत्पीड़न से पीड़ित बच्चों से सिर्फ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों के सदस्य ही काउंसिलर की मौजूदगी में इंटरव्यू कर सकते हैं। अदालत ने बिहार आश्रय गृह मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास करने के लिए दिल्ली राज्य महिला आयोग को आड़े हाथ लिया और कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह का संचालन करने वाले गैर सरकारी संगठन को वित्तीय सहायता देने पर जजों ने बिहार सरकार को आड़े हाथ लिया। इस आश्रय गृह की बालिकाओं से सामूहिक बलात्कार किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। आश्रय गृह का सोशल ऑडिट करने वाले टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने अदालत को बताया कि बिहार में इस तरह की 110 संस्थाओं में से 15 संस्थाओं के मामले में चिंताजनक तथ्य मिले हैं। इस पर बिहार सरकार ने अदालत से कहा कि विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित इन 15 संस्थानों से संबंधित यौन उत्पीड़न के नौ मामले दर्ज किए गए हैं।

गौरतलब है कि बिहार सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त गैर सरकारी संगठन का मुखिया बृजेश ठाकुर इस आश्रय गृह का संचालन करता था। इस आश्रय गृह में 30 से अधिक लड़कियों के साथ कथित रूप से बलात्कार और उनका यौन शोषण किए जाने के आरोप हैं। इस मामले में ठाकुर सहित 11 व्यक्तियों के खिलाफ 31 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और बाद में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया था। आश्रय गृह की 42 में से 34 बालिकाओं के मेडिकल परीक्षण में उनके यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। दो अन्य के अस्वस्थ होने की वजह से उनका मेडिकल परीक्षण नहीं कराया जा सका है। इस गैर सरकारी संगठन द्वारा मुजफ्फरपुर में संचालित आश्रय गृह को काली सूची में शामिल करके इसमे रहने वाली लड़कियों को पटना और मधुबनी के आश्रय गृहों में स्थानांतरित कर दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें ठाकुर और आश्रय गृह की महिला स्टाफ शामिल हैं।

सुनवाई कर रहे पीठ में न्यायमूर्ति केएम जोसेफ भी

अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह देश भर में आश्रय गृहों में नाबालिगों के यौन शोषण की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले प्रस्तावित कदमों से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराए।

सुप्रीम कोर्ट के नवनियुक्त जजों ने शपथ ली

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ को मंगलवार को वरिष्ठता के इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ दिलाई गई। इन तीन न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने अपने न्यायालय कक्ष में सवेरे साढ़े दस बजे सबसे पहले न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी को शपथ दिलाई। इसके बाद न्यायमूर्ति सरन और फिर न्यायमूर्ति जोसेफ ने पद की शपथ ली। इन न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह में शीर्ष अदालत के सारे न्यायाधीश और विधि अधिकारी उपस्थित थे। इनके अलावा बड़ी संख्या में वकील भी प्रधान न्यायाधीश के न्यायालय में मौजूद थे।

इससे पहले न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी आधिकारिक अधिसूचना में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ का नाम वरिष्ठता क्रम में सबसे नीचे होने की वजह से सोमवार तक कुछ विवाद की स्थिति बनी हुई थी। शीर्ष अदालत केकॉलिजियम के सदस्यों में से न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति एके सीकरी सहित कुछ न्यायाधीशों ने सरकारी अधिसूचना में न्यायमूर्ति जोसेफ की वरिष्ठता कम करने के संबंध में प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात करके इस पर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की थी। प्रधान न्यायाधीश ने आपत्ति व्यक्त करने वाले न्यायाधीशों को आश्वासन दिया था कि वे इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे।