लोकपाल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि लोकपाल की नियुक्ति कब तक होगी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति के पीठ ने केंद्र से 10 दिन में हलफनामा दायर कर लोकपाल की नियुक्ति के लिए लगने वाले समय और उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है। पीठ ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह 10 दिन के भीतर देश में लोकपाल की नियुक्ति की समय सीमा तय कर उसे सूचित करे। अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 17 जुलाई तय की है। न्यायालय ने पिछले वर्ष अपने फैसले में कहा था कि प्रस्तावित संशोधनों के संसद में पारित होने तक लोकपाल कानून को निलंबित रखना न्यायोचित नहीं है।
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने लोकपाल की नियुक्ति के संबंध में सरकार की ओर से प्राप्त लिखित निर्देश सौंपे और कहा कि लोकपाल चयन समिति की शीघ्र ही बैठक होगी। सुप्रीम कोर्ट ने गैर सरकारी स्वयंसेवी संगठन कामन काज की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार जान-बूझकर लोकपाल नियुक्त नहीं कर रही है। शीर्ष अदालत ने केंद्र को अपने निर्देश में कहा कि हलफनामे में यह बताना होगा कि इस नियुक्ति के बारे में क्या कदम उठाए जाने हैं और इसकी समय सीमा क्या है। अटार्नी जनरल ने जब लिखित निर्देशों के प्रासंगिक पैराग्राफ का जिक्र किया तो पीठ ने कहा कि हम चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी जो कुछ भी वह कहना चाहते हैं, हलफनामे में ही कहें।
कामन काज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने कहा कि साढ़े चार साल बाद भी लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसी संगठन ने लोकपाल की नियुक्ति को लेकर याचिका दायर की थी। उन्होंने शीर्ष अदालत के बीते साल 27 अप्रैल के फैसले के बावजूद लोकपाल की नियुक्ति नहीं होने के कारण अवमानना याचिका दायर की है। भूषण ने कहा, अब समय आ गया है कि शीर्ष अदालत को सरकार द्वारा लोकपाल की नियुक्ति नहीं किए जाने तक संविधान के अनुच्छेद 142 में प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल कर इसकी नियुक्ति करनी चाहिए। इस पर अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले वह सरकार में सक्षम प्राधिकार का हलफनामा देखना चाहती है।

