केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर इंटरपोल ने भगोड़ा करार दिए गए हीरा कारोबारी नीरव मोदी, उसके भाई निशाल मोदी और उसके कर्मचारी सुभाष परब के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। सीबीआइ और ईडी 13400 करोड़ रुपए के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की जांच कर रही है, जिसमें नीरव मोदी, उसके कई परिजन और कर्मचारी आरोपी बनाए गए हैं। यह नोटिस 29 जून को जारी किया गया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग संस्था- इंटरपोल ने अपनी वेबसाइट पर नोटिस को सोमवार को सार्वजनिक किया। इस नोटिस के जारी होने के बाद नीरव मोदी की दुनिया भर में एक से दूसरे देश आवाजाही अब मुश्किल हो जाएगी।

रेड कॉर्नर नोटिस में इंटरपोल ने अपने 192 सदस्य देशों से कहा है कि अगर भगोड़ा व्यक्ति उनके देश में देखा जाता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाए या हिरासत में ले लिया जाए। इसके बाद भारत के साथ समझौते के मुताबिक उसके प्रत्यर्पण या निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इंटरपोल ने यह रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) मुंबई की विशेष अदालत में दाखिल सीबीआइ के आरोप पत्र और वहां के विशेष न्यायाधीश जेसी जगदाले द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर जारी किया है। नोटिस में इंटरपोल ने नीरव के सभी पांच पासपोर्ट की विस्तृत जानकारी दी है। ये पासपोर्ट उसे मई 2008 से मई 2017 के बीच जारी किए गए थे। इसमें यह जानकारी भी है कि भारत सरकार ने ये पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं, फिर भी वह इनके आधार पर यात्रा करने में सफल रहा है। 24 फरवरी को इंटरपोल के सेंट्रल डेटाबेस में यह जानकारी प्रसारित की गई थी कि भारत सरकार नीरव का पासपोर्ट रद्द कर रही है उसके बावजूद वह कई देशों की यात्रा करता रहा। विदेश मंत्रालय ने उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया था, जिसके बाद यह जानकारी डिफ्यूजन नोटिस में जोड़ी गई।

भारतीय जांच व प्रवर्तन एजंसियों ने इंटरपोल को नीरव मोदी के पांच पते भी दिए हैं, जो न्यूयॉर्क के मेनहट्टन, ईस्ट चेस्टर और सेंट्रल के हैं। एक पता दुबई के अल बायान का भी है। इंटरपोल को यह जानकारी भी दी गई है कि उसके हांगकांग, यूनाइटेड किंगडम, बेलारूस, ब्रुसेल्स, न्यूयॉर्क, यूएई और अन्य स्थानों पर जाने की संभावना है। सीबीआइ ने 15 फरवरी को इंटरपोल के जरिए जारी डिफ्यूजन नोटिस के जरिए नीरव मोदी का पता लगाने का प्रयास किया था लेकिन इससे भी खास सफलता नहीं मिली क्योंकि जांच एजंसी के अनुरोध का जवाब केवल ब्रिटेन ने ही दिया। जांच एजंसी ने 25 अप्रैल, 22 मई, 24 मई और 28 मई को ब्रिटेन की इंटरपोल समन्वय संस्था को रिमाइंडर भेजे। इसी तरह के रिमाइंडर अमेरिका, सिंगापुर, बेल्जियम, यूएई और फ्रांस की एजंसियों को भी भेजे गए।

देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले के सामने आने से कई हफ्ते पहले जनवरी के पहले सप्ताह में नीरव मोदी ने अपनी पत्नी अमी मोदी (अमेरिकी नागरिक), भाई निशाल मोदी (बेल्जियम का नागरिक) और मामा मेहुल चोकसी के साथ देश छोड़ दिया था। इन सभी के नाम आरोपियों के रूप में सीबीआइ द्वारा दर्ज प्राथमिकी में हैं। सीबीआइ ने नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के अलावा निशाल और परब के नाम आरोप पत्र में शामिल किए हैं। नीरव और उसके मामा मेहुल चोकसी ने कारोबार और सेहत संबंधी कारणों और अन्य वजहों का हवाला देते हुए जांच में शामिल होने के लिए भारत लौटने से मना कर दिया।