चीन के सैनिकों ने 10 अक्तूबर को अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में एक किलोमीटर तक घुसपैठ की। हालांकि, भारतीय जवानों की आपत्ति के बाद वे लौट गए। इस घटना पर भारत ने सैन्य कमांडरों की बैठक में चीनी पक्ष से आपत्ति दर्ज कराई है। पिछले दिनों भी कई दफा भारतीय सीमा का अतिक्रमण करने की खबरें सामने आईं थीं। तब चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में विभिन्न जगहों पर वास्तविक नियंत्रण रेखा पार कर घुसपैठ की थी। चीनी सीमा के हालात के बारे में सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने इस बारे में विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भेजी है। अरुणाचल के दिबांग घाटी में चीनी सैनिकों को देख भारतीय सैनिकों ने उन्हें रोका और सख्ती से वापस जाने को कहा। चीनी सैनिक कुछ देर अड़े रहे, फिर लौट गए।
इससे पहले अगस्त में भी चीनी सेना ने उत्तराखंड में घुसपैठ की थी। उस वक्त चीनी सैनिकों से संबंधित रिपोर्ट आइटीबीपी ने गृह मंत्रालय को भेजी थी। अगस्त महीने में ही चीनी सेना तीन बार (6, 13 और 15 तारीख) भारतीय सीमा में घुसी थी। एक दफा वह चार किलोमीटर अंदर तक आइटीबीपी की अग्रिम चौकी तक पहुंच गई। भारतीय आइटीबीपी के जवानों ने इन सैनिकों को खदेड़ा था। भारत और चीन के बीच चार हजार किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर करीब 23 विवादित और संवेदनशील इलाके हैं। ताजा गतिरोध को दोनों देशों की सेनाएं प्रोटोकॉल के तहत हल कर रही हैं। सैन्य कमांडरों की बैठक में बातचीत की गई है। इसी साल जुलाई में लद्दाख में भी चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी। उन्होंने यहां देमचोक में पांच टेंट लगाए थे। भारतीय सैनिकों ने उन्हें तिरंगा दिखाकर लौटने को भी कहा था, लेकिन चीन के सैनिकों ने इसे नजरअंदाज कर दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने टेंट हटा लिए थे।

