उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी पार्टियां एनडीए से नाराज चल रही हैं और गठबंधन तोड़ने की धमकी दे रही हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर कई बार सार्वजनिक मंच से भाजपा नेतृत्व पर निशाना साध चुके हैं। अब एक अन्य सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) ने भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल अपना दल आगामी लोकसभा चुनाव में 12 लोकसभा सीट देने की मांग कर रही है। पार्टी की नेता और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह एनडीए का साथ छोड़कर कांग्रेस के साथ जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि अपना दल (एस) के अध्यक्ष आशीष पटेल ने गुरुवार को प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात भी की है।
बीजेपी का साथ मिलने से पहले जीत को तरसती थी पार्टीः अपना दल पार्टी का गठन साल 1995 में दिवंगत सोनेलाल पटेल ने किया था। सोनेलाल पटेल पूर्वी उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जाति कुर्मी के प्रभावशाली नेता थे। कुर्मी जाति का पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में अच्छा खासा प्रभाव है। अपना दल, कुर्मी जाति के साथ-साथ पिछड़े वर्ग के गैर-यादव, कुशवाहा, मौर्य, निषाद, पाल और सैनी वोटरों पर भी प्रभाव रखने का दावा करती हैं। फिलहाल अपना दल का बंटवारा हो गया है और इसके एक धड़े अपना दल (सोनेलाल) की संरक्षक बनी सोनेलाल के बेटी अनुप्रिया पटेल, जोकि मौजूदा भाजपा सरकार में केन्द्रीय मंत्री हैं। वहीं पार्टी के दूसरे धड़े अपना दल का नेतृत्व सोनेलाल की पत्नी द्वारा किया जा रहा है।
बता दें कि साल 2007 के विधानसभा चुनावों में अपना दल को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि पार्टी ने 39 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसके बाद साल 2009 के लोकसभा चुनावों में 29 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उस वक्त भी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिल सकी। साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी अपना दल के हालात में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। दरअसल पार्टी ने 76 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे सिर्फ एक सीट वाराणसी की रोहनिया सीट पर जीत मिली। जहां से अनुप्रिया पटेल ने जीत दर्ज की।
2014 से बदली किस्मतः अपना दल ने साल 2014 में भाजपा के साथ गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ा और 2 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। खास बात ये रही कि इन चुनावों में अपना दल को इन दोनों लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। अनुप्रिया पटेल ने मिर्जापुर से धमाकेदार जीत हासिल की। भाजपा और अपना दल का गठबंधन 2017 के विधानसभा चुनावों में भी चला। इस दौरान अपना दल को सीट बंटवारे में 11 सीटें मिली, जिनमें से पार्टी ने 9 सीटों पर जीत हासिल की।

