महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के रहने वाले कैप्टन अमोल यादव ने एक बेहतरीन कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने अपने घर की छत पर 6 लोगों के बैठ सकने लायक एक एयरक्राफ्ट बनाया है। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जहाज के टेस्ट का पहला चरण समाप्त हो चुका है। इसके अभी 2 चरण शेष हैं। जिसमें ये सर्किट पूरा करेगा और दूसरे में यह एक हवाई अड्डे से दूसरे हवाई अड्डे तक की यात्रा करेगा।

समाचार एजेंसी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल से अमोल यादव के द्वारा बनाये गये इस एयरक्राफ्ट का वीडियो भी साझा किया है। अमोल यादव ने बताया कि हमने इस विमान को 2016 में मेक इन इंडिया योजना के तहत प्रदर्शित किया था। अन्ततः हमें 2019 में इसे उड़ने का परमिट भी मिल गया है। यह भारत में विमान निर्माण उद्योग को स्वदेशी बनाने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।

इस विमान को अब अगले चरण में दो हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ने की परीक्षा से गुजरना होगा। कैप्टन अमोल यादव ने यह जानकारी दी है। कैप्टन अमोल यादव पिछले दो दशक से पूरी तरह से ‘भारत में निर्मित’’ विमान पर काम कर रहे हैं।यादव ने इस विमान को महाराष्ट्र के पश्चिमी उपनगरीय इलाके कांदिवली में अपने घर की छत पर खुद डिजाइन किया और विकसित किया है।उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक तकनीशियन के साथ विमान की पहली परीक्षण उड़ान की है और इस दौरान विमान की उड़ान संतुलित रही है। यह काफी अच्छी रही है।’’यादव ने कहा कि इस उड़ान में यह देखा गया है कि जमीन से ऊपर उठने के बाद विमान की उड़ान संतुलित रहती है अथवा नहीं यह देखा गया।

विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए ने इस विमान की पहले चरण की उड़ान के लिये पिछले साल अंत में अनुमति दे दी थी।यादव ने कहा कि इस परीक्षण उड़ान के लिये बीमा की जरूरत थी जो कि काफी बड़ी रकम थी। मैंने अपने परिवार के सदस्यों की मदद से इसे हासिल किया। ‘‘मैंने वह सब कुछ किया जो कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय को इस परीक्षण उड़ान से पहले चाहिये था।’’

उन्होंने कहा कि परीक्षण उड़ान के दौरान विमान 15 से 20 सैकिंड हवा में रहा और उसके बाद सुरक्षित जमीन पर उतर गया।यादव ने कहा कि अगले चरण की उड़ान में जोखिम है। ‘‘यदि हम आगे बढ़ते हैं तो हमें कम से कम एक से डेढ़ करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसलिये हमें धन जुटाना होगा।’’जेट एयरवेज के पूर्व पायलट यादव को इस विमान को बनाने में करीब छह साल लग गय।

(भाषा इनपुट्स के साथ)