झारखंड के लातेहार में 2016 में हुई मॉब लिंचिंग के मामले में प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) ने दोषी पाए गए आठ लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही इन सभी पर जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि नहीं चुकाने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई है।
क्या था मामला-
बता दें कि लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र में 18 मार्च 2016 को मजलूम इम्तियाज खां और मजरुम अंसारी नाम के दो पशु विक्रेता खपरेलवर गांव से गुजर रहे थे। तभी कुछ लोगों ने इन्हे घेरकर गो तस्करी का आरोप लगाते हुए पीटना शुरू कर दिया। भीड़ द्वारा पीटे जाने के बाद इन दोनों पशु विक्रेताओं की मौत हो गयी थी। जिसके बाद लोगों ने इनके शवों को रस्सी से बांधकर पेड़ से लटका दिया था। इस घटना से जुड़े सभी आरोपी 22 मार्च 2016 तक पुलिस की गिरफ्त में आ गए थे। ये मामला संसद में भी उठा था।
कोर्ट ने सुनाई सजा –
इस घटना की सुनवाई करते हुए लातेहार प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) राशिकेश कुमार की अदालत ने मजलूम इम्तियाज खां और मजरुम अंसारी की हत्या के मामले में दोषी पाए गए आठ लगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया और साथ ही जुर्माना राशि नहीं देने पर एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनाई है।
मामले में इन्हे मिली सजा- विशाल, प्रमोद, मनोज, अवधेश, शाहदेव , मिथिलेश प्रसाद उर्फ बंटी, अरुण व मनोज कुमार शामिल हैं। मामले में सरकार की ओर से बी साहू वकील के रूप में पेश हुए।
अदालत के फैसले के बाद मृतकों ने ऊपरी अदालत जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि दोषियों को उम्रकैद नहीं फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि घटना के 2 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिला। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों ने पीड़ित परिवार को कुछ सहायता दी थी। घटना के बाद घटना के बाद तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर और एसपी एक-एक लाख रुपए मुआवजे की पेशकश को परिवार वालों ने ठुकरा दिया था और 5-5 लाख की मांग की थी। गौ रक्षा मंच के प्रदेश प्रभारी सुरेश राम भी न्यायालय में मौजूद थे। उन्होंने भी इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत जाने की बात कही है।

