मेघालय की पूर्वी जयंतिया हिल्स पर अवैध कोयला खदान में फंसे मजदूरों के रेस्क्यू ऑपरेशन में 42 दिन बाद पहली कामयाबी मिली है। रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के दौरान नेवी को करीब 200 फीट की गहराई में एक मजदूर का शव मिला है। बाकी 14 मजदूरों के लिए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। इस ऑपरेशन में एनडीआरएफ से नेवी तक तमाम दल रेस्क्यू में जुटे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शव मिलने के बाद उसे प्रशासनिक अधिकारी पीएस सीपुंग को सौंप दिया गया जिन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

दरअसल, खदान में काम कर रहे 15 मजदूर 13 दिसंबर को अचानक पास में बहने वाली नदी का पानी घुस जाने से फंस गए थे। बताया जा रहा है कि 370 फीट गहरी इस खदान में 100 फीट से भी ज्यादा तक पानी भरा है। इतने दिनों तक इंतजार करते-करते मजदूरों के परिजनों की हालत खराब हो गई लेकिन इस बीच खबर आई है कि रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के दौरान नेवी को करीब 200 फीट की गहराई में एक मजदूर का शव मिला है। इस रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन में नेवी और एनडीआरएफ की टीम शामिल थी।

बता दें कि इतने लंबे समय तक मजदूरों के खदान के अंदर फंसे होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी नाराजगी जाहिर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए टिप्पणी की थी, ‘इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि सब मारे जा चुके हैं, कुछ जिंदा हैं, कुछ मारे गए हैं या सभी जिंदा हैं। उन्हें बाहर निकाला जाना चाहिए। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे सभी जिंदा हों।’ साथ ही कोर्ट ने कहा था कि लगभग तीन हफ्ते से खदान फंसे लोगों के लिए ‘हर मिनट कीमती’ है। गौरतलब है कि एनजीटी की रोक के बावजूद यहां अवैध तौर पर खनन जारी था। गोताखोर पानी के अंदर रिमोट से ऑपरेट होने वाले व्हीकल का इस्तेमाल कर रहे हैं।