मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में सोमवार की शाम आग लगने से आठ लोगों की मौत हो गई जबकि मरीज और आगंतुकों समेत 141 से ज्यादा लोग झुलस गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के एक अधिकारी ने बताया कि उपनगरीय अंधेरी के मरोल में स्थित ईएसआईसी कामगार अस्पताल में आग लगने के बाद मरीजों और आगंतुकों समेत कुल 147 लोगों को निकाला गया। उन्होंने बताया, ‘‘अग्निशमन र्किमयों ने सीढ़ियों की मदद से उन्हें अस्पताल की अलग-अलग मंजिलों से बचाया।” अधिकारी ने बताया, ‘‘अस्पताल की इमारत में भूतल के साथ पांच मंजिल है और आग चौथी मंजिल पर लगी थी।” उन्होंने बताया कि इन सभी को अलग अलग अस्पतालों में ले जाया गया।

यह इमारत महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन (एमआईडीसी) परिसर के तहत आती है। बीएमसी के आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, आग इमारत के चौथे माले पर करीब शाम चार बजे लगी थी। रेस्क्यू टीम ने 108 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया, जबकि गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में तत्काल शिफ्ट किया।

जोगेश्वरी ट्रॉमा अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉ.हरबंस बावा ने बताया था, “कुल नौ मरीजों को अन्य अस्पताल शिफ्ट किया गया है। उन्हें यहां सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। हम और मरीजों को शिफ्ट करने के बारे में सोच रहे हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि यह लेवल 4 की आग थी। एक अधिकारी ने बताया- इमारत के आसपास धुआं ही छा गया था, जबकि उस दौरान छत पर कुछ लोग फंसे होने की आशंका जताई गई थी। आनन-फानन में मौके पर पांच पानी के टैंकर, सात फायर इंजन व तीन टर्नटेबल सीढ़ियां मंगा ली गई थीं। आग लगी कैसे? फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है।

वहीं, पार्षद वी.महादेश्वर ने कहा है कि अभी तक घटना के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। एमआईडीसी आग से संबंधित ऑडिट्स के लिए जिम्मेदार है। जांच-पड़ताल में यह देखा जाएगा कि क्या इस इलाके में आग से जुड़ी ऑडिट हुई थीं या नहीं। वह आगे बोले- मामले की जांच-पड़ताल हो रही है, मगर हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया जा सके।