UP News: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली को चर्चाओं के घेरे में ला दिया है। इस वीडियो में गाजियाबाद के कौशांबी थाने के पुलिस अधिकारी एक बुजुर्ग व्यक्ति की पीठ पर मोबाइल फोन रखकर उसकी तथाकथित ‘नागरिकता जांच’ करते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में पुलिस अधिकारी को कहते हुए सुना जा सकता है, “बांग्लादेश के तो नहीं हो। मशीन लगाओ भई इनकी पीठ पर, बोलो कहां के हो। ये मशीन तो बांग्लादेश बता रही है। इस पर एक बुजुर्ग बताते हैं कि उनका घर बिहार के अररिया में हैं। साथ में खड़ी एक लड़की बताती है कि यहां अररिया के लोग ही रहते हैं।”

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बांग्लादेशी बताकर डराने-धमकाने की कोशिश की। वीडियो में दिख रहे 76 साल के मोहम्मद सिद्दीक ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी बेटी से मशीन को लेकर बहस की। सिद्दीक 1987 से गाजियाबाद में रह रहे हैं, उन्होंने कहा, “हमने उन्हें सभी आवश्यक सबूत दिखाए कि हम बिहार के मूल निवासी हैं।”

ये भी पढ़ें: गाजियाबाद में तलवारें बांटने का आरोप

टीएमसी सांसद ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने एक्स पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और इसकी वैधता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। गोखले ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “गाजियाबाद के एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि उनके पास एक ऐसी मशीन है जिसे पीठ पर लगाकर बांग्लादेशियों का पता लगाया जा सकता है। उनके साथ सीआरपीएफ के आरएएफ जवान भी हैं। गाजियाबाद के डीएम, गाजियाबाद पुलिस और सीआरपीएएफ से, यह एक बेहद आधुनिक आविष्कार है या तो हम तीन हफ्ते में संसद में आपकी मशीन पर चर्चा कर सकते हैं या फिर इन अधिकारियों को निलंबित करें।”

पुलिस कमिश्नरेट ने क्या लिखा?

इस पोस्ट पर गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नरेट ने लिखा, “अपराध नियंत्रण के प्रयासों के तहत, अस्थायी बस्तियों/झुग्गी-झोपड़ियों में संदिग्ध व्यक्तियों से समय-समय पर पूछताछ और सत्यापन किया जाता है। इसी संदर्भ में, कौशांबी पुलिस ने पूछताछ और सत्यापन किया, जिसके दौरान लोगों से प्राप्त दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच की गई।”

ये भी पढ़ें: ग्रेनो वेस्ट और गाजियाबाद वालों के लिए गुड न्यूज, लाल कुआं से जोड़ने वाली सड़क होगी चौड़ी