उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक और दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहां कुछ दोस्तों ने ही अपने साथी का अपहरण कर उसे मौत के घाट उतार दिया और इसके बाद परिवारवालों से फिरौती की रकम लेकर भाग निकले। पुलिस ने अब इस पूरे केस का खुलासा कर दिया है। कानपुर एसएसपी ने बताया कि लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का 22 जून को अपहरण हुआ था। पुलिस ने जांच के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया था। इसमें संजीत के दो दोस्त भी शामिल थे। पूछताछ में दोस्तों ने कबूल किया है कि उन्होंने अपहरण के 4 दिन बाद ही संजीत की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसके परिवार को फिरौती के लिए फोन किया।

संजीत के परिवारवालों ने 23 जून को ही उसके लापता होने की शिकायत बर्रा थाने में दर्ज कराई गई थी। 26 जून को इस सिलसिले में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। हालांकि, अपहरणकर्ताओं की ओर से उसके परिवार को फिरौती का पहला फोन 29 जून को आया। पुलिस के मुताबिक, उसके किडनैपर दोस्तों ने बताया है कि उन्होंने संजीत की हत्या 26-27 जून को ही कर दी थी। इसके बाद उसके शव को पांडु नदी में फेंक दिया था। एसएसपी ने बताया कि अभी संजीत के शव को बरामद करने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मामले की जांच में पुलिस की ढिलाई बड़ा मुद्दा बन कर सामने आ रहा है। दरअसल, पीड़ित के परिवार का कहना है कि उन्होंने 29 जून को पुलिस की मौजूदगी में 30 लाख रुपए फिरौती की रकम चुकाई थी। लेकिन इसके बावजूद संजीत कभी घर नहीं लौटे। पुलिस भी शिकायत दर्ज होने के बाद संजीत की खोज-खबर पता करने में नाकाम रही। परिवारवालों का कहना था कि उन्होंने 30 लाख रुपए से भरा बैग रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया था।

गौरतलब है कि संजीत यादव के अपहरण पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा भी योगी सरकार पर निशाना साधती रही हैं। शुक्रवार को संजीत की मौत की पुष्टि होने के बाद प्रियंका ने कहा कि यूपी में एक गुंडाराज आया है, जिसमें कानून व्यवस्था गुंडों के सामने पूरी तरह सरेंडर दिखाई दे रही है। उप्र में कानून व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। प्रियंका ने आगे कहा, “आम लोगों की जान लेकर अब इसकी मुनादी की जा रही है। उन्होंने कहा था कि घर हो, सड़क हो, ऑफिस हो कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता। विक्रम जोशी के बाद अब कानपुर में अपहृत संजीत यादव की हत्या हुई।”