कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार को गिराने की नाकाम कोशिश के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के समीप गुड़गांव के एक रिसोर्ट में डेरा डाले भाजपा के कुछ विधायक वापस कर्नाटक लौट गए। इंडियन एक्सप्रेस के दिल्ली कॉन्फिडेंशिल में छपी खबर के मुताबिक इससे राज्य के पूर्व सीएम और पार्टी के वरिष्ठ नेता बी एस येदियुरप्पा को किसी और नेता की तुलना में ज्यादा निराश हुए। पता चला है कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ दिल्ली में अपने विधायकों के साथ मीटिंग करने की कोशिश की, मगर ‘ऑपरेशन लोटस’ कामयाब नहीं हो सका। दरअसल पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का विचार था कि वे तब तक हस्तक्षेप नहीं करेंगे जब तक कि राज्य में सरकार बनाने के लिए येदियुरप्पा के पास पर्याप्त संख्या नहीं ना हो।
वहीं बाद में कर्नाटक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि दक्षिणी राज्य में गठबंधन सरकार को कोई खतरा नहीं है। भाजपा पर गठबंधन सरकार को अस्थिर करने के ‘निष्फल प्रयासों’ का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी की साजिश का ‘पर्दाफाश’ हो गया है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) प्रमुख दिनेश गुंडू राव ने कहा, ‘सभी संपर्क में हैं। आप किसी के बारे में भी यह नहीं कह सकते हैं कि वह संपर्क में नहीं है… आपने (मीडिया) उन लोगों के नामों की सूची निकाली, जो पार्टी छोड़ सकते थे। इनमें से अधिकतर तो लौट आए, अन्य भी वापस आ जाएंगे।’
दूसरी तरफ सरकार गिराने के आरोप के येदियुरप्पा ने सत्ता पक्ष पर पलटवार करते हुए शुक्रवार को कहा कि यह सबसे पुरानी पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह अपने विधायकों को एकजुट रखे और उनकी पार्टी का दक्षिणी राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन में ‘भ्रम’ पैदा होने से कुछ लेना देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ये आरोप ‘‘सच्चाई से परे’’ हैं कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है। येदियुरप्पा ने कहा, ‘‘यह सच्चाई से परे है कि हम कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन में भ्रम पैदा कर रहे हैं। हम 104 लोग (भाजपा विधायक) एकजुट हैं। हमारी एकमात्र मंशा कर्नाटक में 20 लोकसभा सीटें जीतने की है और हम इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। (भाषा इनपुट सहित)
