झारखंड के दुमका में जिला अदालत ने पांच साल पहले के एक मुकदमे में नौ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बता दें कि दोषी करार दिए लोगों ने एक महिला को डायन बताकर उसकी हत्या कर दी थी। साथ ही इन लोगों पर शव को बोरे में भरकर जलाने का आरोप भी लगा था। अदालत ने दोषियों पर एक लाख आठ हजार रुपए जुर्माना अदा करने की सजा भी सुनाई है।

क्या था मामला- मजडीहा गांव निवासी लालमुनि देवी नाम की महिला को डायन बताकर 9 लोगों ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में एक ही परिवार के मदन राय, फुदन राय, रोहित राय, सेनाथ राय, कारू राय, दिनेश्वर राय, गुही राय, लुखो देवी और हारूनी देवी लोगों पर हत्या का आरोप लगा था।

अदालत ने माना दोषी-  लालमुनि देवी की हत्या के मामले में नामजद किये गए 9 आरोपियों पर पिछले 5 सालों से दुमका की जिला अदालत में मुकदमा चल रहा था। जिसके बाद शुक्रवार को द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए धारा 3022/149 के तहत आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है।

गौरतलब है कि कोर्ट ने कहा कि जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर छह-छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। वहीं धारा 147 के तहत दो-दो वर्ष और डायन प्रतिरोध अधिनियम की धारा-3 के तहत तीन-तीन माह और 4 के तहत छह-छह माह के कारावास की सजा भी सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने फैसले में जुर्माने की राशि एक लाख आठ हजार रुपए भी वादी को भुगतान करने का आदेश दिया है।

13 दिसंबर 2103 का है मामला- अभियोजक पक्ष के वकील सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा के मुताबिक जरमुंडी थाना क्षेत्र के मजडीहा गांव निवासी विलासी देवी के बयान के आधार पर जरमुंडी थाना में दोषी पाए गए 9 आरोपियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसमें कहा गया कि 13 दिसम्बर 2013 को सुबह 7 बजे लालमुनि देवी नाम की महिला की डायन कह कर हत्या कर दी गई और फिर बोरा में भर कर लाश को जला दिया गया। मामले में वादी और अभियुक्तगण सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं। बता दें कि मुनी देवी हत्याकांड में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा और बचाव पक्ष की ओर से भरत किशोर प्रसाद ने पैरवी की। इस दौरान सरकार की ओर से सात गवाह पेश किए गए।