जम्मू-कश्मीर के पीर पंचाल के रहने वाले जुबैर अहमद तुर्रे एक मई से लापता था। पुलिस का कहना था कि जुबैर एक मई को शोपियां के कीगम पुलिस थाने से फरार हो गया था। वहीं स्थानीय नागरिकों और जुबैर के परिजनों को संदेह था कि पुलिस हिरासत में उसके संग कोई अनहोनी घटी है। लेकिन रविवार (14 मई) को जुबैर की गुमशुदगी के रहस्य से पर्दा तब हटा जब सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो सामने आया।
जुबैर ने कथित वीडियो में उग्रवादी संगठन में शामिल होने की बात कही है। जुबैर ने वीडियो में “गुलामी” और पुलिस एवं अन्य सुरक्षाबलों के “दुर्व्यवहार” को उग्रवादी बनने की वजह बतायी है। पांच मिनट के इस वीडियो में जुबैर खाकी पोशाक पहने नजर आ रहा है। वीडियो में जुबैर को हथियारों के जखीरे के साथ बैठा दिखाया गया है। जुबैन ने कुरान की आयतें पढ़कर अपनी तकरीर शुरू की। जुबैर ने वीडियो में कहा कि उसके पास इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था। वीडियो में जुबैर ने ये नहीं बताया है कि वो किस संगठन से जुड़ा है।
कश्मीर रीडर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार जुबैर ने कहा है कि उसे और उसके परिवार को अत्याचार का शिकार होना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार जुबैर ने दावा किया है कि उसे बगैर किसी कसूर के चार साल जेल में गुजराने पड़े। जुबैर के अनुसार उसे जेल में रखने के लिए उस पर आठ बार पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया। कश्मीर में 1978 से लागू पीएसए एक्ट के तहत आरोपी को छह महीने तक बगैर आधिकारिक मुकदमे के पुलिस हिरासत में रखा जा सकता है।
जुबैर ने दावा किया है कि उसने हाई कोर्ट में खुद पर पीएसए के तहत मामला दर्ज करने को चुनौती दी लेकिन उसे रिहा नहीं किया गया। जुबैर के अनुसार पुलिस हिरासत से भागने से पहले वो तीन महीने पुलिस की “गैर-कानूनी” हिरासत में रहा। जुबैर ने वीडियो में कथित तौर पर कहा है कि उसके पिता द्वारा उसे रिहा कराने की हर कोशिश विफल हो गयी। द एशियन एज की रिपोर्ट की अनुसार जुबैर को 2014 में पहली बार पत्थरबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

