दिल्ली के गाजीपुर में मौजूद लैंडफिल साइट पर ‘कूड़े का पहाड़’ लगातार बढ़ता जा रहा है। एक स्टडी में सामने आया है कि 2020 तक इस पहाड़ की ऊंचाई ताजमहल से भी ज्यादा हो जाएगी। बता दें कि इस वजह से संयुक्त राष्ट्र दिल्ली को सबसे प्रदूषित राजधानी की कैटिगरी में रखता है। गौरतलब है कि गाजीपुर लैंडफिल के आसपास हमेशा काफी बदबू रहती है। इस साइट का आकार फुटबॉल के 40 से ज्यादा मैदानों के आकार से भी बड़ा हो चुका है, जो हर साल 10 मीटर बढ़ रहा है।
पूर्वी दिल्ली के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर अरुण कुमार के मुताबिक, कूड़े के इस पहाड़ की ऊंचाई 65 मीटर (213 फीट) से ज्यादा हो चुकी है। यदि कूड़े का ढेर बढ़ने की यही स्पीड रही तो 2020 तक इसकी ऊंचाई आगरा के ताजमहल (73 मीटर) ऊंचा हो जाएगी। बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी पिछले साल चेतावनी दे चुका है। कोर्ट ने कहा था कि अगर यही स्थिति बरकरार रही तो लैंडफिल साइट के ऊपर से गुजरने वाले हवाई जहाज को अलर्ट करने के लिए कूडे़ के ढेर पर रेड वॉर्निंग लाइट्स लगानी पड़ेंगी।
ट्रकों से फेंका जाता है कूड़ाः गाजीपुर लैंडफिल साइट को 1984 में खोला गया था और 2002 में यह अपनी क्षमता तक पहुंच गया। दिल्ली शहर का रोजाना पूरा कूड़ा काफी ट्रकों से यहां फेंका जाता है। दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘गाजीपुर में हर दिन लगभग 2,000 टन कचरा डंप किया जाता है।’
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कूडे़ का ढेर ढहने से हुई थी दो लोगों की मौतः बता दें 2018 में भारी बारिश में कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे दबकर 2 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद गाजीपुर में कूड़ा डंपिंग पर प्रतिबंध लगा था, लेकिन यह उपाय कुछ दिन ही चला, क्योंकि अधिकारियों के पास इसका कोई विकल्प नहीं था।
आग बुझने में लगता है समयः नई दिल्ली में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की सीनियर रिसर्चर शांभवी शुक्ला ने कहा कि कचरे से निकलने वाली मिथेन गैस वातावरण में मिलने पर और भी घातक हो जाती है।
स्थानीय लोगों ने सुनाई आपबीतीः स्थानीय लोगों ने कहा कि कूड़े के ढेर से आने वाली बदबू से उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है। गाजीपुर लैंडफिल साइट के नजदीक रहने वाले 45 वर्षीय पुनीत शर्मा ने बताया, ‘जहरीली गंध ने हमारे जीवन को नरक बना दिया है। लोग हर समय बीमार रहते हैं।’
