राजधानी दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वालों पर अब और सख्ती होगी। इसकी निगरानी के लिए पर्यावरण मार्शल तैनात किए जाएंगे। ये मार्शल रात में भी गश्त करेंगे और प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे। यह फैसला उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में किया गया है। प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी के बाद सोमवार को उपराज्यपाल ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के सदस्य ने बताया कि इस स्थिति पर काबू पाने के लिए अब तक बवाना, नरेला, मुंडका, नांगलोई, पंजाबी बाग, द्वारका, आनंद विहार और भलस्वा व गाजीपुर डलाव स्थल पर रात की गश्त के लिए पर्यावरण मार्शल तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बवाना, नरेला व आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण की समस्या और इन क्षेत्रों में औद्योगिक रबर व प्लास्टिक अपशिष्ट का उचित निपटान नहीं किया जा रहा है। इस वजह से यह प्रदूषण संकट खड़ा हुआ है। पर्यावरण संरक्षण की निगरानी करने वाली सुप्रीम कोर्ट की समिति एपका के अध्यक्ष डॉ भूरेलाल ने बताया कि नांगलोई, द्वारका, टिकरी कलां, मुंडका, पीरागढ़ी, कमरुद्दीन नगर, हिरण कूदना इत्यादि क्षेत्रों में खुले में आग जलाना, रबर के ढेर, प्लास्टिक कचरा और धूल प्रदूषण पाया गया है। यह 20 अक्तूबर तक हुई जांच की रिपोर्ट में सामने आया है। बैठक में पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन व ऐपका अध्यक्ष समेत दिल्ली सरकार व स्थानीय निकाय के अधिकारी शामिल थे।
जमीन न मिलने से खुले में जल रहा कूड़ा
बैठक में डीपीसीसी के सदस्य सचिव ने बवाना व नरेला में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की। इस दौरान तस्वीरों के माध्यम से दिखाया गया कि सड़कों के किनारे खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। यह भी बताया गया कि कचरे को इकट्ठा न करने का प्राथमिक कारण औद्योगिक संघों, डीएसआइआइडीसी व उत्तरी नगर निगम के मध्य समन्वय की कमी और कचरा डालने के लिए जमीन की पर्याप्त अनुपलब्धता है।
113 औद्योगिक इकाइयां होंगी बंद
प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए दिल्ली के विभिन्न इलाकों में चल रही 113 औद्योगिक इकाइयों को बंद किया जाएगा। इन उद्योगों को तय समयसीमा में पीएनजी में परिवर्तित करने का आदेश दिया गया था, लेकिन उद्योगों ने यह व्यवस्था लागू नहीं की है। इसीलिए इन इकाइयों के बंद करने के आदेश दिए गए हैं। 113 इकाइयों में 67 इकाइयां नरेला व बवाना औद्योगिक क्षेत्रों में हैं। डीपीसीसी ने अब तक 1368 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस और 417 को प्रदूषण फैलाने के कारण बंद करने का नोटिस जारी किया है।
