दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के स्थायी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण सोमवार को राजधानी की सड़कों से बड़ी तादाद में डीटीसी बसें नदारद रहीं, जिसके कारण दफ्तर व कॉलेज जाने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डीटीसी के अस्थायी या अनुबंधित कर्मचारी पहले से ही हड़ताल पर हैं। डीटीसी कर्मचारी यूनियन ने दावा किया है कि उनकी हड़ताल पूरी तरह सफल रही, ज्यादातर कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहे और सरकार की ओर से लगाए गए एस्मा की परवाह किए बिना कर्मचारियों की लड़ाई जारी रहेगी। वहीं मंगलवार से डीटीसी के तीन अनुबंधित कर्मचारी भूख हड़ताल पर जा रहे हैं, जिनमें एक दिव्यांग महिला कर्मचारी भी शामिल है। यूनियन ने कहा है कि अनुबंधित कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी।
वहीं सोमवार को डीटीसी की हड़ताल के कारण बसों में सफर करने वाले लोगों के हफ्ते की शुरुआत परेशानी भरी रही। हड़ताली कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष वाल्मीकि झा ने कहा कि हमारी मांगें अभी भी अधूरी हैं। सरकार ने कोई बात नहीं मानी है और न वह बात करने को राजी है। उन्होंने कहा कि एस्मा लगाए जाने के बावजूद कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे, वे जेल जाने को भी तैयार हैं। संविदा कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नियमित किया जाए, समान काम के लिए समान वेतन मिले, हटाए गए अनुबंधित कर्मचारियों को बहाल किया जाए और नई बसें लाई जाएं।
डीटीसी के अनुबंधित कर्मचारी 22 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं और डीटीसी मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार की ओर से एस्मा लगाने के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। एस्मा हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है और इसे लगाए जाने के बावजूद हड़ताल पर जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। रविवार को डीटीसी ने एक विज्ञप्ति जारी कर छह महीने के लिए डीटीसी पर आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम लगाए जाने की सूचना दी और सभी हड़ताली कर्मचारियों को काम पर वापस आने को कहा।
निगम ने यह जानकारी भी दी कि दिल्ली सरकार के आदेशानुसार 4 अगस्त 2018 से पूर्व न्यूनतम मजदूरी दर बहाल कर दी गई है और अनुबंधित कर्मचरियों की न्यूनतम मजदूरी दर को कम करने वाला आदेश वापस ले लिया गया है। इसके अलावा अनुबंधित कर्मचारियों समेत सभी कर्मचारियों को अपने-अपने डिपो में रिपोर्ट करने को कहा गया है। जो कमर्चारी डिपो में रिपोर्ट नहीं करेंगे, उनके खिलाफ डीआरटीए की धारा 15 (नियुक्ति की शर्तें और सेवा) अधिनियम, 1952 के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आॅल इंडिया सेंट्रल काउंसिल आॅफ ट्रेड यूनियन ने भी दावा किया कि हड़ताल सफल रही। यूनियन ने कहा कि डीटीसी प्रशासन ने वेतन कटौती की अधिसूचना वापस ले ली है, लेकिन दो अन्य मांगें (समान काम के लिए समान वेतन और ज्यादा बसें लाना) अभी भी नहीं सुनी गई हैं।

