MCD Mayor Elections: महापौर, उपमहापौर और स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव तीसरी बार टलने से कुछ पार्षदों में मायूसी छाई हुई है। उनका कहना है कि हमें जनता ने चुनाव में वोट दिया है कि इलाके में मूलभूत काम किया जाए, लेकिन महापौर, उपमहापौर और स्थाई समिति के सदस्यों के चुनाव के नाम पर हमें भी बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

दिल्ली गेट के निगम पार्षद किरण राकेश कुमार ने कहा कि निगम का काम जनता की छोटी-बड़ी शिकायतों दूर करना है। इनमें इलाके में नाले और सफाई के साथ प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ बारात घर की मरम्मत और बागवानी को दुरुस्त करना शामिल है, लेकिन जब निगम का गठन नहीं होगा तब तक हम किससे जनता की समस्याएं बताएं।

उन्होंने कहा कि जोन का गठन होने के बाद उपायुक्त के पास हम लोग क्षेत्रीय समस्याएं लेकर जाते हैं और फिर काम कराते हैं, लेकिन इस समय यह नहीं हो रहा है। जबकि सिविल लाइंस की निगम पार्षद विकास टांक ने कहा कि सरकारी कर्मचारी हमारी नहीं सुन रहे चूंकि निगम का गठन नहीं होने से उसके ऊपर कोई आधिकारिक दबाव नहीं है।

टांक कहते हैं कि अभी पार्षदों को फंड नहीं मिला है और जब तक फंड नहीं मिलता तब तक क्षेत्रीय विकास से संबंधित कोई काम नहीं हो पाएगा। इसी तरह की बातें पार्षद उर्मिला शर्मा और मोहम्मद सादिक ने भी कही। इनका कहना था कि शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जाने का इस समय कोई मतलब नहीं बनता। हम दिल्ली सरकार से कुछ काम करा लेते हैं, लेकिन निगम का काम तो निगम से ही होगा। सरकारी कर्मचारियों को जब तक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी कि चुने गए पार्षदों को तरजीह देनी चाहिए तब तक क्षेत्रीय जनता का काम इसी तरह प्रभावित होता रहेगा।

हमें सड़कों पर बिजली और गड्डे भरने के लिए निगम उपायुक्त के पास जाना होता है, लेकिन अभी तक उपायुक्त से मिलने का मौका ही नहीं मिला। पार्षदों का कहना है कि मुख्यालय में जिस तरह हंगामा हो रहा है उससे हमारे इलाके की जनता भी नाखुश है और वह भी जल्द इन महत्वपूर्ण पदों पर चुनाव कराना चाहती है।