तमिलनाडु में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी चुनावी रैली होनी है। यह रैली चेन्नई के पास मदुरंथगम में होगी। ऐसे में तमिलनाडु में एनडीए आगामा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गठबंधन को और मजबूत करने में जुटी हुई है।
मंगलवार रात से ही केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की अगुवाई में बीजेपी के वरिष्ठ नेता चेन्नई में अन्य पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं, जिससे एक मजबूत गठबंधन वाली सरकार बनाई जा सके और सीटों को लेकर चल रही तनातनी को भी सुलझाया जा सके, जिससे प्रधानमंत्री के सामने एकजुट एनडीए मोर्चा सुनिश्चिम हो सके।
एनडीए में शामिल हुई एएमएमके
बुधवार को टीटीवी दिनाकरन के नेतृत्व वाली अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कजगम (एएमएमके) औपचारिक रूप से एनडीए में दोबारा शामिल हो गई। दूसरी ओर सत्तारूढ़ डीएमके ने एआईएडीएमके के एक पूर्व मंत्री और वैथिलिंगम को पार्टी में शामिल कर लिया, जो ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) के अंतिम वरिष्ठ वफादार थे। इससे एनडीए के भीतर कमजोर सौदेबाजी की कड़ी उजागर हो गई।
मजबूत दिखना चाहती है एनडीए
पीयूष गोयल पीएम मोदी की 23 जनवरी की रैली के पहले गठबंधन को मजबूत स्थिति में लाकर दिखाना चाहते हैं, इसलिए वह सहयोगी दलों और वापसी करने वाले साझेदारों और कई दलों के नेताओं से ताबड़तोड़ मुलाकात कर रहे हैं।
कुछ भाजपा नेताओं की मानें तो एनडीए गठबंधन मोदी से साथ मंच पर यह साबित करना चाहता है कि वह तमिलनाडु में सबसे मजबूत गठबंधन है। जिससे सत्तारूढ़ पार्टी व अन्य दलों को यह संदेश जाए कि एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए राज्य में बिखरे हुए विपक्ष को एकजुट रखे हुए है।
सीटों को लेकर चल रही उधेड़बुन
अभी एनडीए गठबंधन में पहले ही ए.के.पलानीस्वामी (ईपीएस) की एआईएडीएमके, अंबुमणि रामदास की पट्टाली मक्कल काची (पीएमके), जीके वासन की तमिल मनीला कांग्रेस, छोटे दल और एसी शनमुघम, परिवेंधर और जॉन पांडियन जैसे नेता की पार्टियों शामिल हैं। लेकिन इस एकता के दिखावे के पीछे मांगों और तनातनी का जटिल जाल बुना हुआ है, जो एक 56 सीटों तक ही सीमित है। ये वो सीटें हैं जो एआईएडीएमके से भाजपा अपने लिए मांग रही है, जबकि शेष सीटें उसके छोटे सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी। बता दें कि तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं।
भाजपा के एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक, एएमएमके नेता को सात सीटें देने की पेशकश की गई है जबकि वे 12 सीटें मांग रहे हैं, इस नेता के खिलाफ सीबीआई एक मामले की जांच कर रही है।
दिनाकरन की वापसी महत्वपूर्ण
एनडीए के रणनीतिकारों के अनुसार, दिनाकरन की वापसी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे एक जाना-पहचाना नाम वापस आ रहा है जिसका कुछ क्षेत्रों में प्रभाव है। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, यह पहला कदम है और एएमएमके की वापसी को अंतिम समझौते के बजाय एक आवश्यक शुरुआती कदम बताया।
बताया जा रहा कि जीके वासन ने करीब 10 सीटों की मांग की है, लेकिन उन्हें तीन सीटें मिलने की संभावना है। परिवेंधर ने छह सीटों की मांग की है, लेकिन उन्हें दो सीटों मिल सकती है, जबकि शनमुघम को पांच सीटों की मांग के मुकाबले एक सीट मिलने की उम्मीद है। पांडियन को भी एक सीट मिलने की संभावना है। इधर पीएमके के भीतर, अंबुमणि गुट को एआईएडीएमके से 18 सीटें मिलने की उम्मीद है। बता दें कि पिछली बार इन्हें 41 सीटें दी गई थीं। इससे वरिष्ठ नेता और उनके पिता एस रामदास नाराज हो सकते हैं
बताया जा रहा है कि रामदास सीनियर ने पहले डीएमके से 10 सीटें मांगी थीं और एनडीए के सूत्रों का कहना है कि उन्हें अपने साथ लाने की अभी भी उम्मीद है। हालांकि, ऐसी भी खबरें हैं कि डीएमके उन्हें उन सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए समर्थन दे रही है जहां उनके प्रतिद्वंद्वी गुट के उम्मीदवार हैं। हालांकि, रामदास गुट के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वे अंबुमणि गुट की सीटों पर चुनाव लड़ना पसंद नहीं करेंगे।
बुधवार को रामदास के थाइलापुरम स्थित आवास पर भी चर्चा चल रही थी, जिसमें नेता दो मुख्य विकल्पों पर विचार कर रहे थे: डीएमके में शामिल होना या डीएमके की प्रतिक्रिया में देरी होने पर अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के साथ गठबंधन करना है।
के. अन्नामलाई इन सीटों से लड़ सकते हैं चुनाव
इधर भाजपा के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि लोकप्रिय नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई पश्चिमी तमिलनाडु के इरोड या कोयंबटूर से चुनाव लड़ सकते हैं। आगे पढ़िए तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि क्यों नाराज होकर विधानसभा से निकले बाहर
