यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लखनऊ की दो दुकान और चाट के ठेले वाले के घर की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि जो भी करो, बस लगे रहो। इस दौरान उन्होंने अपने भी संघर्ष के दिनों को याद किया कि कैसे वो पढ़ाई के लिए लखनऊ आकर एक छोटे से कमरे में रहते थे और नहाने के लिए उनको बाहर जाना पड़ता था।
डिप्टी सीएम ने कहा कि लखनऊ में दो दुकानें हैं कि एक दुकान लगभग 10 हजार स्क्वायर फीट की है वो भी खाने-पीने का सामान बेचती है। और उसके बिल्कुल सामने 50 मीटर की दूरी पर दूसरी दुकान है। वो दुकान 10/10 की भी नहीं है। वो दिनभर खाने-पीने का सामान बेचता है और पीने का पानी भी नहीं देता है, जबकि वहीं सामने वाला (10 हजार स्क्वायर फीट) बिसलेरी पानी और चाय भी पूछता है। उसके मिठाई का डिब्बा भी बढ़िया है, लेकिन दोनों की बिक्री लगभग बराबर है। उन्होंने कहा कि ये हजरतगंज का मामला है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि ऐसा केवल परफेक्शन के कारण है। उन्होंने कहा कि जब भी आप परपेक्ट रहोगे। इसमें छोटा-बड़ा नहीं होता। मैं इस वक्त जिस दायित्व को संभाल रहा हूं। मेरे बहुत मित्र जानते कि जब मैं लखनऊ में पढ़ने के लिए आया, उस वक्त छोटा सा कमरा लेकर रहते थे। उस वक्त इस समय की तरह बाथरूम अटैच नहीं होते थे। सार्वजनिक में जाते थे, वहीं से नहाकर और पानी की बाल्टी लेकर आते थे। और खाना बनाकर खाते थे। उन्होंने कहा कि लेकिन हमें पता था कि हमको जिस काम के लिए भेजा गया है, हमको वही काम करना है।
उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में आए, लोगों ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव के लिए पैसा चाहिए। धनबल-जनबल चाहिए। उन्होंने कहा कि हम विपरीत परिस्थितियों में लग गए तो लग गए। इसी की बदौलत आज हम यहां खड़े हैं। किसी काम को करना है तो लगे रहो, उसको छोड़ो नहीं। ईश्वर ने अगर आपको टॉपर बनाया है तो ये मानकर चलिए की आप सर्वश्रेष्ठ हो। आपके अंदर वो कुव्वत है, जो किसी में नहीं है। इसी को मानकर काम करना चाहिए।
डिप्टी सीएम ने कहा कि आईएएस बनना भी जरूरी नहीं है, लेकिन जो भी करो टॉप पर करो। और जो टॉपर है उसी को पूछा जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भले ही आप चित्रकार बन जाओ।
सुख-सुविधा और अच्छी पुस्तकें कभी ज्ञान का माध्यम नहीं बन सकतीं: डिप्टी सीएम
ब्रजेश पाठक ने हजरतगंज के नरही मोहल्ले में रहने वाले एक स्टूडेंट की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि वहां एक चाट का ठेला लगाता है। जायसवाल परिवार है। उन्होंने कहा कि हम दो-तीन साल पहले उसके घर गए थे। उसने मेरिट में टॉप किया था और फीस भरने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे, क्योंकि चाट का ठेला कोरोना में लग नहीं रहा था। उसके विद्यालय वाले कह रहे थे कि पैसा जमा करो, अन्य़था अगली क्लास में हम नहीं लेंगे। पाठक ने कहा कि हम उसके घर गए, हमने उसको हिंदी मीडियम से निकाला। उसका इंगलिश मीडियम में एडमिशन कराया। उसकी फीस हमने पूरी भरी। उसको पुस्तकें उपलब्ध कराईं। उन्होंने कहा कि वो बच्चा बहुच मेधावी है पढ़ रहा है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि ये मानकर चलिए कि सुख-सुविधा और अच्छी पुस्तकें कभी ज्ञान का माध्यम नहीं बन सकतीं। ज्ञान का माध्यम हमारी लगन, मेहनत बनती है।
