नोटबंदी के फैसले की वित्तमंत्रालय में होने के बावजूद मुझे पहले से कोई जानकारी नहीं थी। बेशक सभी फैसले मंत्रिमंडल में होते हैं और यह सरकार की साझा जिम्मेवारी भी है। पर दुनिया का इतिहास देख लीजिए। ऐतिहासिक फैसले सदैव एक आदमी ने ही लिए। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार नहीं मानते कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था कोई नुकसान होगा। इसके उलट वे इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार का दावा करते हैं। गंगवार मानते हैं कि नोटबंदी के फैसले से दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। देश के भीतर भी इस फैसले ने आम आदमी के मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख बढ़ाई है। यही वजह है कि बैंक से जरूरत के मुताबिक नोट नहीं मिलने की परेशानी झेलते हुए भी आम आदमी कह रहा है कि प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। लोग प्रधानमंत्री की नीयत और ईमानदारी पर कतई शक नहीं कर रहे।
अपनी यह राय गंगवार ने जनसत्ता के विचार श्रृंखला कार्यक्रम ‘बारादरी’ में बातचीत के दौरान रखी। नोटबंदी के फैसले की वित्तमंत्रालय में होने के बावजूद पहले से कोई जानकारी नहीं होने के तथ्य को गंगवार ने बेझिझक स्वीकार किया। उनका कहना था कि बेशक सभी फैसले मंत्रिमंडल में होते हैं और यह सरकार की साझा जिम्मेवारी भी है। पर दुनिया का इतिहास देख लीजिए। ऐतिहासिक फैसले सदैव एक आदमी ने ही लिए। नोटबंदी की आलोचना करने वालों को गंगवार ने सुझाव दिया कि उन्हें आम आदमी का नजरिया देखकर राय बनानी चाहिए। आम आदमी लगातार कह रहा है कि कदम अच्छा है।
नोटबंदी से देश की बड़ी आबादी के परेशान हो जाने की बात को नकारते हुए गंगवार बोले कि सवा सौ करोड़ में से कम से कम सौ करोड़ आबादी तो पूरी तरह संतुष्ट है। इंदिरा गांधी ने बेशक लोगों के हितों की दुहाई देते हुए बैंकों का 1969 में राष्ट्रीयकरण किया था। पर पच्चीस करोड़ से ज्यादा लोगों के खाते तो बैंकों में मोदी के ढाई साल के कार्यकाल में ही खुल पाए। इनमें भी एक तिहाई तो जीरो बैलेंस वाले हैं। पर कुछ बैंक कर्मचारियों ने तो ऐसे जीरो बैलेंस वाले खातों को भी जेब से पैसा जमा कर बैलेंस वाला बना डाला। इसके जवाब में वित्त राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार इसकी जांच करा रही है।
तमाम दिक्कतों के बावजूद नोटबंदी के बारे में गंगवार के मुताबिक आम आदमी यही मान रहा है कि यह फैसला देश के हित में है। सवाल काले और सफेद धन का नहीं है। सवाल यह ज्यादा अहम है कि सारा धन लिखा-पढ़ी में आना चाहिए। प्रधानमंत्री ने लोकसभा चुनाव के समय भी कहा था कि वे सत्ता में आए तो कड़ा कदम उठाएंगे। नोटबंदी से पहले आय घोषणा योजना शुरू कर लोगों को अपने कालेधन को सफेद करने का अवसर दिया गया था। नोटबंदी से पहले सरकार ने मुकम्मिल तैयारी क्यों नहीं की? इस सवाल पर गंगवार बोले कि यह कोई आम फैसला नहीं है। देश के इतिहास में ऐसे फैसले रोज नहीं होते। सरकारी बैंकों का एनपीए बढ़ने की बात को मानते हुए गंगवार ने कहा कि सरकार इस दिशा में सजग है।
वित्त राज्यमंत्री के मुताबिक सरकार की मंशा नकदी के चलन को कम करने (लैस कैश) की है, नकदी के लेनदेन को खत्म करने (कैशलेस) की नहीं। नकदी की तरलता कम होने से किसी तरह की भी अराजकता बढ़ने को उन्होंने नकार दिया। बकौल गंगवार नोटबंदी के 49 दिन बाद भी लोगों ने धीरज नहीं खोया। तकलीफ झेल कर भी यही कहा कि फैसला देशहित में है। नोटबंदी से रिजर्व बैंक की स्वायत्तता कम होने और बार-बार फैसले बदलने से रिजर्व बैंक की साख गिरने के सवाल पर गंगवार ने कहा कि ऐसी धारणा बनाने से रिजर्व बैंक की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।
नोटबंदी का फैसला चुनावी फायदे के मकसद से किए जाने के विपक्ष के आरोपों को उन्होंने गलत बताया। अलबत्ता कहा कि चुनाव पर इसका क्या असर होगा, यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा। प्रधानमंत्री ने चुनाव को ध्यान में रखकर फैसला नहीं किया। विपक्ष के विरोध के मुद्दे पर गंगवार का कहना था कि विपक्षी दलों ने इसे अव्वल तो ठीक से समझा नहीं। ऊपर से संसद में चर्चा नहीं करने दी। प्रधानमंत्री के बारे में संसद में नहीं बोलने के विपक्ष के आरोप को निराधार बताते हुए गंगवार बोले कि संसद में पिछले 25 सालों में कोई प्रधानमंत्री इतने समय मौजूद रहा ही नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए गंगवार ने कहा कि वे बहुत सतर्क हैं। नोटबंदी के पीछे उनका अपना कोई स्वार्थ नहीं है। वे ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनके बारे में आम आदमी मानता है कि वे जो भी कदम उठा रहे हैं, सब देशहित में है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती के उत्पीड़न के आरोप को भी गंगवार ने नकार दिया। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग सभी बड़े लेन-देन वालों के खातों की जांच कर रहा है।

