राजधानी को और अधिक हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार अगले तीन वर्षों तक बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाएगी। इस दौरान अधिक ऑक्सीजन देने वाले पीपल और बरगद जैसे वृक्षों के रोपण पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित पौधरोपण लक्ष्य को दोगुना करने का भी निर्णय लिया है।
इस संबंध में हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मुख्य सचिव राजीव वर्मा, डीडीए के उपाध्यक्ष समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पौधरोपण के लिए अलग-अलग प्रजातियों की सूची भी प्रस्तुत की गई।
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हालांकि, गृह मंत्रालय ने पौधरोपण कार्यक्रम में कुछ प्रजातियों को शामिल न करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इनमें खास तौर पर खेजड़ी, रोंझ और बबूल जैसी प्रजातियां शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली वन विभाग को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि राजधानी में आम और इमली के कलमी पौधे न लगाए जाएं। इन दोनों वृक्षों की केवल मूल प्रजातियों को ही पौधरोपण अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।
दिल्ली सरकार को फरवरी 2029 तक पूरे पौधरोपण कार्यक्रम को पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। वर्तमान में दिल्ली सरकार ने राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में कई पौधशालाओं को चिह्नित किया है, जहां विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार किए जाते हैं। इस पर भी गृह मंत्रालय ने गंभीरता जताते हुए इन पौधशालाओं का हर तीन माह में निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आवश्यक प्रजातियों के पौधे समय पर उपलब्ध कराए जा सकें।
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केंद्र सरकार ने विशेष रूप से इन पौधशालाओं में पीपल और बरगद के पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है, ताकि राजधानी के हरित आवरण को मजबूत किया जा सके।
