35 सालों से अधिक समय से भूमि अधिकारियों के समक्ष लंबित एक किसान की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय नौकरशाही में बाबू कल्चर औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक है और यह हमें कभी विकसित नहीं होने देगा।
जज चंद्रधारी सिंह ने कहा कि अब समय आ गया कि इस मानसिकता को छोड़ दिया जाए और इस देश के लोगों को ऐसी प्रवृत्तियों और औपनिवेशिक अतीत के अवशेषों से मुक्त होना जरूरी है।
कोर्ट ने कहा, “आज, भारत अपनी आजादी के 75 साल के अमृत महोत्सव का जश्न मना रहा है और एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए नए जोश एवं अधिक दृढ़ विश्वास के साथ दासता की बेड़ियों को दूर कर आगे बढ़ रहा है। नौकरशाही में बाबू कल्चर औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक है और देश को विकसित करने में एक बड़ी बाधा है। यह सही समय है कि इस मानसिकता को दूर किया जाए और देश के लोगों को इस तरह की कैंसरकारी प्रवृत्तियों और औपनिवेशिक अतीत के अवशेषों से मुक्त किया जाए।”
ईश्वर सिंह नाम के एक किसान ने उच्च न्यायालय को बताया कि मैदानगढ़ी में उसकी जमीन 1987 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (सीसीए) द्वारा अधिग्रहित की गई थी। हालांकि, उन्हें इसका मुआवजा मिला लेकिन वैकल्पिक भूखंड के आवंटन के लिए उनका आवेदन अभी भी लंबित है। कोर्ट ने कहा कि 2 अगस्त, 2022 को दिए गए आदेश में अधिकारियों से 15 दिनों के अंदर ईश्वर सिंह के आवेदन का निपटारा करने के लिए कहा गया था। इसमें विफल रहने पर संबंधित अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के भी निर्देश दिए गए थे।
न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन करने में विफल रहे हैं और ना ही समय सीमा बढ़ाने के लिए उनकी तरफ से कोई आवेदन आया है।
अदालत ने कहा , “यह स्पष्ट रूप से भूमि और भवन विभाग के उपाध्यक्ष, डीडीए और सचिव के उच्च नेतृत्व को दर्शाता है।” कोर्ट ने कहा कि परेशान करने वाली बात यह है कि अधिकारियों के इस रवैये के कारण उच्च न्यायालयों के समक्ष याचिकाएं दायर की गई हैं, जिससे लंबित मामलों में वृद्धि हुई है। कोर्ट ने अधिकारियों को एक हलफनामे के साथ उपस्थित होने के लिए कहा था, जिसमें उन्हें कोर्ट को आदेशों का पालन न करने का कारण बताना था।
मंगलवार को अधिकारी कोर्ट में पेश हुए और एक हलफनामा दायर कर कहा कि आवेदन का फैसला जल्द करेंगे। कोर्ट ने अब उन्हें अपने आदेशों का पालन करने के लिए एक और महीने का समय दिया है।
