मौजूदा वक्त में सोशल मीडिया ने समाज को जोड़ने में जबरदस्त भूमिका निभाई है। कई बार इसने समाज हित की छोटी सी चिनगारी को आंदोलन में तब्दील किया है। यह इस वक्त का दुर्भाग्य है कि इतने अच्छे और इतने मजबूत मंच का इस्तेमाल नकारात्मक प्रवृत्तियों को हवा देने में भी किया गया। ध्यान होगा कुछ अर्सा पहले मुजफ्फरनगर में दंगे फर्जी वीडियो के कारण ही भड़के थे जिन्हें फेसबुक पर पोस्ट किया गया था। ऐसे ही कुत्सित मंसूबों के साथ दो दिन पहले दिल्ली में हुई एक डॉक्टर की हत्या को भी सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, जिसे दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने नाकाम कर दिया। डीसीपी ने ट्वीट कर बयान दिया और मामले को स्पष्ट किया। डीसीपी के इस संवेदनशील ट्वीट के तुरंत बाद लोगों ने इसे फेसबुक पर भी शेयर किया।
होली के दिन गुरुवार को दिल्ली के विकासपुरी में दंत चिकित्सक डॉ. पंकज नारंग को कुछ लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला था। इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डॉ. नारंग की बेरहमी से हत्या के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर चल पड़ा। ट्विटर पर कुछ लोग हैशटैग बनाकर इस घटना को सांप्रदायिक एंगल देने की कोशिश में जुट गए। इस घटना को पुराने सांप्रदायिक मामलों से भी जोड़ा गया। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने के मुद्दे को सिरे से खारिज कर दिया है। आरोपियों के नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस जघन्य हत्या को सांप्रदायिकता से जोड़ने की कोशिश की गई।
इससे पहले कि यह मुद्दा जोर पकड़ता, अतिरिक्त डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने ट्वीट कर बताया कि गिरफ्तार किए गए नौ लोगों में से चार नाबालिग हैं और मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है, जैसा कि कुछ लोग सोशल साइट्स पर अफवाह फैला रहे हैं। पश्चिमी जिले की अतिरिक्त डीसीपी मोनिका ने शुक्रवार शाम को ही अपने ट्वीट में लिखा कि नौ आरोपियों में से पांच हिंदू हैं और झगड़े के वक्त मौजूद दो में से एक शख्स हिंदू था। उन्होंने लिखा कि मुस्लिम आरोपी उत्तर प्रदेश के हैं न कि बांग्लादेश के। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एक ट्वीट कर डीसीपी मेनिका के कामों की तारीफ की है।
बुधवार देर रात टी-20 मैच में भारत के हाथों बांग्लादेश के हारने के बाद डॉक्टर नारंग अपने भांजे और आठ साल के बेटे के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी बॉल सड़क पर आ गई। तभी वहां से दो युवक बाइक पर निकले और उन्हें बॉल लग गई। इसी बात पर डॉक्टर नारंग और युवकों में बहस हो गई। आरोपी उस वक्त उनको गाली देकर और अपनी बाइक वहीं छोड़कर चले गए, लेकिन कुछ देर बाद वे करीब 15 लोगों के साथ लौटे और डॉक्टर नारंग पर हमला कर दिया। डॉक्टर नारंग के सिर पर गंभीर चोटें लगने से उनकी मौत हो गई।
सोशल मीडिया पर लोग डॉक्टर नारंग की हत्या को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं। लोग ट्वीट के जरिए अपराधियों को सख्त सजा देने की मांग भी कर रहे हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि डॉक्टर नारंग न दलित, न महिला और न ही सलमान की तरह अमीर हैं, उनके लिए आप कैंडल मार्च या धरने की उम्मीद नहीं कर सकते। एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि यह भारत में ही हो सकता है कि घोड़े की टांग टूटने पर इतना हंगामा हो और एक व्यक्ति की हत्या करने पर कुछ भी न हो। हालांकि डॉक्टर नारंग का परिवार इस दुख की घड़ी में सहानुभूति और शांति चाहता है।
