दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की कथित एलएलबी की डिग्री मामले में तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के 19 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कार्रवाई करने की तैयारी में है। इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस की टीम शुक्रवार को भागलपुर पहुंची। थाना हौजखास के एसएचओ सतिंदर सांगवान ने इस संवाददाता को बताया कि हाल के दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में जो कार्रवाई की है, उसकी जानकारी हासिल के मकसद से वे भागलपुर आए हैं। कोई भी कसूरवार दिल्ली पुलिस के शिकंजे से नहीं बच पाएगा, चाहे वे विश्वविद्यालय की सेवा में हों या सेवानिवृत्त हो चुके हों।प्रति कुलपति डॉ. अवधेश किशोर राय ने बताया कि दिल्ली पुलिस की टीम दो दिसंबर को हुई परीक्षा समिति, अनुशासन समिति की बैठक और तीन दिसंबर को कुलपति की अध्यक्षता में हुई सिंडिकेट की बैठक में इस बाबत लिए गए फैसले की लिखित जानकारी लेने आई है। पुलिस की टीम इस सिलसिले में कुलसचिव से मुलाकात करेगी। कुलसचिव का मोबाइल शुक्रवार को लगातार बंद था और दफ्तर में उनसे मिलने की मनाही थी।
बताते चलें कि तोमर मामले की जांच के लिए प्रतिकुलपति की अध्यक्षता में एक आंतरिक समिति गठित की गई थी जिसने इसी साल फरवरी में रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में तोमर को फर्जी तरीके से मुंगेर के विश्वनाथ सिंह लीगल स्टडीज में दाखिला लेने और कानून की डिग्री हासिल करने का दोषी पाया गया। साथ ही समिति ने तोमर की मदद करने और लापरवाही के लिए मुंगेर कालेज और विश्वविद्यालय के 15 अधिकारियों और कर्मचारियों को कसूरवार ठहराया। इनमें मुंगेर कालेज के तत्कालीन प्राचार्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह, वहां के हेड क्लर्क कृष्णानंद, व्याख्याता जनार्दन प्रसाद यादव, भागलपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत डॉ. रजी अहमद, राजीव रंजन पोद्दार, निरंजन कुमार, अनिरुद्ध दास, दिनेश श्रीवास्तव (सभी सेवारत हैं), नारायण सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ. सदानंद राय, रामअवतार शर्मा, शंभूनाथ सिन्हा, भूदेव प्रसाद सिंह, और एचके पांडे ( सभी सेवानिवृत्त) शामिल हैं।
ये सभी इस दौरान परीक्षा विभाग में काम कर चुके हैं या कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अफसर सतिंदर सांगवान के मुताबिक इस मामले में इन 15 के अलावा भी पांच और अधिकारी और कर्मचारी हैं जिनकी संलिप्त पाई गई है। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस तोमर समेत इन सभी 19 लोगों के खिलाफ जल्द आरोपपत्र दायर कर अदालत से गिरफ्तारी वारंट हासिल करेगी।उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन तोमर की डिग्री रद्द करने और अपने कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई के बाबत राज्यपाल सह कुलाधिपति के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस महीने की दो और तीन तारीख को अपनी बैठकों में इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी।

