झारखंड विधानसभा चुनाव में हार स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, ‘यह मेरी हार है, पार्टी की हार नहीं। मैंने झारखंड के लिए ईमानदारी से काम किया है। मैं नतीजों का स्वागत करता हूं।’ उन्होंने कहा कि भाजपा जनता का जनादेश स्वीकार करती है। उन्होंने कहा, ‘लगता है कि भाजपा विरोधी सभी वोट एकत्र हो गए और उनके एकजुट हो जाने से ही हमें हार का सामना करना पड़ा है।’ एक सवाल के जवाब में रघुवर दास ने कहा, ‘लोकतंत्र में जनता का आदेश शिरोधार्य होता है।’ उन्होंने कहा कि पूरा परिणाम आने के बाद ही वह मीडिया से विस्तार से बातचीत करेंगे।
उन्होंने कहा कि जिंदगी में बड़ा लक्ष्य रखना चाहिए। राज्य बाकी पेज 8 पर की 81 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में 65 से ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘भाजपा हमेशा बड़ा लक्ष्य लेकर चलती है। पार्टी हार के कारणों का विश्लेषण करेगी।’ पार्टी की करारी शिकस्त के साथ रघुवर दास अपनी जमशेदपुर पूर्वी सीट भी नहीं बचा पाए।
झारखंड में अब तक संयोग रहा है कि कोई भी मुख्यमंत्री अपनी सीट नहीं बचा सका। बीते 19 साल में यह राज्य अब तक छह मुख्यमंत्री देख चुका है। जमशेदपुर पूर्वी सीट से भाजपा के बागी नेता सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुबर दास को हरा दिया। हालांकि, रघुवर दास झारखंड के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है।
वर्ष 2000 में झारखंड नया राज्य बना था। तब भाजपा ने राज्य की पहली सरकार बनाई थी और बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री बने थे। अगले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद मुख्यमंत्री बने अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा और हेमंत सोरेन भी बाद में अपनी सीट बचाने में सफल नहीं हुए। हेमंत सोरेन 2014 के विधानसभा चुनाव में दुमका में हार के बावजूद बरहेट सीट बचा ले गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर उनकी वापसी नहीं हुई थी।
झारखंड 19 साल में छह मुख्यमंत्री देख चुका है। 28 अगस्त 2008 को मधु कोड़ा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने कुर्सी संभाली। उस वक्त वह विधायक नहीं थे। तमाड़ सीट के उपचुनाव में वह हार गए और सोरेन को पद छोड़ना पड़ा था। 2014 विधानसभा चुनाव की बात करें तो राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी धनवार और गिरिडीह दो सीटों से चुनाव लड़े, लेकिन दोनों जगह हार गए। उस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा भी चाइबासा की मझगांव सीट से हार गए। अर्जुन मुंडा भी 2014 में खरसावां सीट पर हार गए थे।

