जम्मू कश्मीर के सोपोर के हुसैन परिवार और अनंतनाग के इकबाल परिवार को बेताबी से अपने अपने मोबाइल फोन के बजने का इंतजार है। बता दें कि बीस बरस के आमिर हुसैन राठेर और 25 साल के वसीम इकबाल पिछले 11 दिन से घर पर बात नहीं कर सके हैं। दोनों उस भारतीय टीम का हिस्सा हैं जिसने वोर्सेस्टर में दिव्यांगों के लिए हुई क्रिकेट विश्व सीरिज जीती है। गौरतलब है कि उनके जीवन का यह सबसे बड़ा पल था लेकिन अभी उन्हें चिंता अपने वालेदान की सलामती की है। बता दें कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद से वहां टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। इस बीच वहां कई दिनों से धारा 144 लगाई गई है। बता दें कि हालात के सामान्य होने के बाद ही टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं के चलने की बात सामने आ रही है।
जीत पर खुशी तो है लेकिन आमिर को परिवार चिंता हैः दिव्यांगों के लिए हुई क्रिकेट विश्व सीरिज को जीतने के बाद आमिर ने ब्रिटेन से फोन पर प्रेस ट्रस्ट से बात की और कहा ,‘यह पहली बार है कि मैं ईद पर अपने माता पिता से बात नहीं कर सका। मैं 45 दिन से घर से बाहर हूं। पिछले दस दिन से परिवार से बात नहीं हुई। मैं जीत पर बहुत खुश हूं लेकिन उनसे बात होने के बाद ही चिंता दूर होगी।’ बता दें कि अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद घाटी में तनाव जैसा माहौल है। ऐसे में जवानों की तैनाती के साथ वहां के लोगों पर कड़ी नजर भी रखी जा रही है। तनाव और न बढ़े इसलिए टेलीफोन और इंटरनेट सेवाएं वहां पर फिलहाल बंद की गई हैं।
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वसीम और आमिर – रसूल सर हमारे प्रेरणास्रोत हैंः दिव्यांग क्रिकेट विश्व सीरिज विजेता वसीम ने मौजूदा कश्मीर के हालात पर परिवार के लिए चिंता करते हुए कहा ,‘दिल तो वही पड़ा हुआ है। मुझे उम्मीद है कि वे सलामत होंगे। हम 17 सितंबर को लौटेंगे। घर लौटने की इतनी बेकरारी कभी नहीं हुई।’ वसीम और आमिर दोनों परवेज रसूल के शुक्रगुजार हैं जो कश्मीर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। उन्होंने कहा ,‘रसूल सर हमारे प्रेरणास्रोत हैं। वह न सिर्फ हमें सलाह देते हैं बल्कि साजोसामान भी दिया। हमारी तरक्की में उनका बड़ा योगदान है। वह कश्मीरी क्रिकेटरों के आदर्श रहेंगे।’

