जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने और आर्टिकल 370 को खत्म करने के मामले में जहां कांग्रेस जमकर विरोध कर रही है। वहीं पार्टी के युवाओं से लेकर दिग्गज नेताओं ने तक यह बात रखी। कई नेताओं ने इस फैसले को जम्मू-कश्मीर के हित में बताया और उनकी तारीफ की। पार्टी लाइन से हटकर बयान देने वालों में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी, मिलिंद देवड़ा, दीपेंद्र हुड्डा और अदिति सिंह जैसे नाम शामिल हैं।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यह निर्णय देश की अखंडता और जम्मू-कश्मीर के हित में हैं। हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह उनकी निजी राय है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘मेरी व्यक्तिगत राय रही है कि 21वीं सदी में अनुच्छेद 370 का औचित्य नहीं है और इसको हटना चाहिए। ऐसा सिर्फ देश की अखंडता के लिए ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर जो हमारे देश का अभिन्न अंग है, के हित में भी है। अब सरकार की यह जिम्मेदारी है की इस का क्रियान्वयन शांति और विश्वास के वातावरण में हो।’
द्विवेदी बोले- ऐतिहासिक गलती में सुधारः वरिष्ठ कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने केंद्र सरकार के कदम का समर्थन किया और अपनी पार्टी के रुख के विपरीत राय रखते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है। यह बहुत पुराना मुद्दा है। स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे। मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे। मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है।’
मिलिंद देवड़ा ने भी किया समर्थनः उन्होंने कहा 370 हटाए जाने का स्वागत किया। एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘आर्टिकल 370 को रूढ़िवादी बहस का विषय बनाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टियों को अपनी विचारधारा से आगे बढ़कर देश की अखंडता और संप्रभुता को बढ़ाने वाले इस कदम का समर्थन करना चाहिए। कश्मीरी पंडितों को इंसाफ, युवाओं के लिए नौकरियों आदि पर बहस होनी चाहिए।’
रायबरेली विधायक भी बीजेपी के साथः गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने भी इस मसले पर पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है। सिंह ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, ‘यूनाइटेड वी स्टैंड, जय हिंद, #Article 370’ इस पर एक यूजर ने उनसे पूछा- ‘आप तो कांग्रेसी हैं।’ इस पर उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं हिंदुस्तानी हूं।’

