गुजरात सरकार के ‘खुले में शौच मुक्त राज्य’ होने के दावों की कैग ने हवा निकाल दी है। द कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में अभी तक कई घरों में शौचालय नहीं हैं। कैग ने अपनी यह रिपोर्ट बुधवार को गुजरात विधानसभा में पेश की। कैग ने गुजरात के बनासकांठा, दाहोद, डंग, छोटा उदेपुर, पाटन, जामनगर, जूनागढ़ और वलसाड जिलों में सर्वे के बाद यह रिपोर्ट बनायी है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने बीते साल 2 अक्टूबर को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया था कि देश के 11 राज्य, जिसमें गुजरात भी शामिल है, स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।
कैग ने कहा कि गुजरात सरकार ने मार्च में घोषित कर दिया था कि राज्य के सभी जिले खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं। हालांकि अभी भी कई घरों में शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ है। इसके साथ ही कैग ने इस बात का भी उल्लेख किया कि काफी लोग शौचालय होते हुए भी उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है। कैग ने इसके लिए पानी उपलब्ध ना होना और शौचालयों में गंदगी जैसे कारण गिनाए हैं। कैग ने गुजरात सरकार के फ्लैगशिप हेल्थ स्कीम के मुख्यमंत्री अमरुतम और मुख्यमंत्री अमरुतम वात्सल्य जैसी योजनाओं में भी गंभीर लापरवाही उजागर की है। कैग ने गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के कारण राज्य के खजाने को 17061 करोड़ रुपए का नुकसान होने का भी मुद्दा उठाया।
इस तरह गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड राज्य का सबसे ज्यादा नुकसान में रहने वाला पब्लिक सेक्टर यूनिट बन गया है। बता दें कि केन्द्र की मोदी सरकार ने देश को खुले में शौच मुक्त करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि अक्टूबर, 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त किया जाए। बीते दिनों डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की 69.4% जनता खुले में शौच से मुक्त हो चुकी है। डब्लूएचओ ने भी भारत की इस पहल की तारीफ की है और माना है कि भारत सरकार की इस पहल से देश में हर साल डायरिया से होने वाली 3 लाख मौतों की रोकथाम हो सकेगी। हालांकि कैग की ताजा रिपोर्ट सरकार की चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है।

