Deoria Mazaar: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में 50 साल पुरानी अवैध मजार को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। तीन बुलडोजर ने करीब छह घंटे तक मजार परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। मुख्य द्वार, बाउंड्री, छह पिलर और गुबंद को गिरा दिया गया। इसके बाद अब आगे की कार्रवाई सोमवार सुबह 11 बजे से शुरू होगी।
मजार के ध्वस्तीकरण को नगर पालिका ने शुक्रवार को नोटिस जारी किया था। रविवार दोपहर करीब 12 बजे 6 थानों के 300 पुलिसकर्मियों के साथ नगर पालिका की टीम गोरखपुर ओवरब्रिज से सटी मजार को तोड़ने पहुंची। परिसर को खाली कराने के बाद घेराबंदी की गई। फिर मजार का ध्वस्तीकरण शुरू किया गया। इस दौरान SDM श्रुति शर्मा भी मौके पर मौजूद रहीं।
भाजपा विधायक ने क्या कहा?
सदर विधायक डॉ. शलभमणि त्रिपाठी की पहल पर आज प्रशासन ने बुलडोजर की कार्रवाई की। इसके लिए विधायक ने पूर्व में सीएम से मिलकर प्रकरण की जानकारी दी थी। इसके बाद ही इसकी सुनवाई में तेजी आई। सदर विधायक ने मजार के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा प्रदेश सरकार अवैध कब्जे पर कार्रवाई करती है। इसका परिणाम देवरिया में देखने को मिला। इस मजार का विरोध करने पर रामनगीना यादव की हत्या कर दी गई थी।
सपा जिलाध्यक्ष ने लगाए आरोप
मजार के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीति में तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव ने कहा जमीन की वैधता क्या है, इसका फैसला कोर्ट करेगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरे प्रदेश में सिर्फ देवरिया की ही मजार सार्वजनिक भूमि पर स्थित है, या फिर अन्य धार्मिक स्थल भी ऐसी जगहों पर हैं।
व्यास यादव ने कहा कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में निष्पक्ष है, तो क्या वह इसी तरह सभी धार्मिक स्थलों की जांच कराकर समान रूप से कार्रवाई करेगी? उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र लोकलाज और संवैधानिक दायरे में रहकर चलता है, न कि किसी वर्ग या जाति विशेष के उत्पीड़न की मानसिकता से। सरकार के इस कदम की चारों ओर निंदा हो रही है और यह कार्रवाई सत्ता के दबाव में की गई मनमानी प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि देवरिया देवों की नगरी है और गंगा-जमुनी तहजीब व भाईचारे की पहचान रही है। चाहे शिव बारात हो या हनुमान जयंती, अल्पसंख्यक समाज द्वारा स्वागत की परंपरा रही है, वहीं सैयद बाबा मजार पर हिंदू समाज की आस्था भी इसी सौहार्द का प्रमाण है।
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सपा जिलाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब शहीद बाबा मजार और कब्रिस्तान का मामला दीवानी न्यायालय और कमिश्नरी में विचाराधीन था, तो फिर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पार्टी इस ध्वस्तीकरण की घोर निंदा करती है। यह दिन देवरिया के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सभी नागरिकों से शांति, संयम और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। व्यास ने कहा कि देवरिया नफरत नहीं, बल्कि भाईचारे और संविधान की धरती है। अंत में उन्होंने कहा- “मंदिर की घंटी, मस्जिद की अज़ान, इक साथ गूंजे-यही देवरिया की पहचान।”
पूरा विवाद क्या?
अब्दुल शाह गनी मजार गोरखपुर रोड ओवरब्रिज से सटी हुई जगह पर बनी है। 2019 में इसकी पहली शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी से की गई। डीएम ने आरबीओ जेई, तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को मौका मुआयना करने और प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया था।
14 दिसंबर 2019 को विपक्षी प्रबंध समिति को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद से ही लगातार तारीख पर तारीख पड़ रही थी। शुक्रवार को एसडीएम कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व जयदीप गुप्ता ने बताया कि एसडीएम कोर्ट ने इस भूमि को पहले ही बंजर घोषित कर दिया था। कोर्ट में बचाव पक्ष से मानचित्र मांगा गया, लेकिन न तो मानचित्र मिला और न ही कब का मजार बना है, उसके ही कागजात दिए गए। इसके बाद नोटिस जारी करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का आदेश दिया गया।
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