महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक खरीदार को फ्लैट का कब्जा देने के संबंध में उसके आदेश का पालन नहीं करने पर शहर के एक बिल्डर को तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश एपी भांगले और सदस्य एस के ककड़े की पीठ ने कहा कि एसडी कंस्ट्रक्शंस के मालिक शेखर दादरकर ने आयोग के 2016 के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की है। इस फैसले में आयोग ने उन्हें निर्देश दिया था कि अरूण केजरीवाल को तीन महीने के अंदर फ्लैट का कब्जा दिया जाए। पैनल ने बताया कि शिकायतकर्ता केजरीवाल ने बकाया राशि का भुगतान कर दिया लेकिन बिल्डर अंतिम फैसले पर अमल करने में नाकाम रहा।
फैसले के पालन पर जेल से किया जाएगा रिहाः महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 18 अप्रैल को दिए अपने आदेश में कहा है कि दादरकर को जेल भेजने के लिए हिरासत में लिया जाए। अगर आरोपी इस पैनल के 20 सितंबर 2016 के अंतिम फैसले का पालन करता है तो उसे जेल से रिहा किया जाएगा। पैनल ने इस बात पर भी गौर किया कि दादरकर ने शिकायतकर्ता को धोखा देने के मकसद से उक्त फ्लैट किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया।
सुनाई सजाः आयोग ने दादरकर को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दोषी पाया और उसे तीन साल की साधारण कैद की सजा देने के साथ ही उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। बता दें हाल ही ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां खरीदार को समय पर बिल्डरों द्वारा कब्जा नहीं दिया गया। बता दें हाल ही मुंबई में एक बिल्डर फर्म को समय से फ्लैट का पजेशन नहीं देने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए बिल्डर फर्म से खरीदार को मुआवजा देने के लिए कहा है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)

