सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के नेता ओम प्रकाश राजभर से अलग होकर नई पार्टी ‘राष्ट्रीय समता पार्टी’ का गठन करने वाले शशि प्रताप सिंह का कहना है कि “ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि न तो मैं और न ही हमारे परिवार का कोई सदस्य आजीवन चुनाव लड़ेगा। मैं समाज के लिए पार्टी बनाया हूं, जब तक समाज के लिए पूरा अधिकार नहीं दिला दूंगा, तब तक चैन से नहीं बैठूंगा। समाज के लिए जिऊंगा और समाज के लिए मरूंगा। लेकिन वे अपने भी लड़े, पत्नी को भी लड़ाया, बेटे को भी लड़ाया, दामाद को भी लड़ाया, समधी को भी लड़ाया। स्थिति यहां तक हो गई कि 2017 में भाजपा से गठबंधन करने के बाद खुद लड़े, अपने बेटे को लड़ाया, तीसरा किसी को नहीं लड़ाया अपने समधी को मऊ से लड़ाया। बाकी लोगों को माल लेकर अपना टिकट दे दिया। ”
उन्होंने कहा, “ओम प्रकाश राजभर के 2002 में पार्टी बनाने के दो साल बाद मैं उनसे जुड़ा। उसके बाद उन्होंने चार-पांच मुद्दे रखे थे, जो बहुत अच्छे थे कि आप सरकार बनवाओ, तकनीकी शिक्षा लागू होगी, सर्वेक्षण के बाद आर्थिक आधार पर आरक्षण सबको दिया जाएगा। एक समान शिक्षा अनिवार्य किया जाएगा। पूर्वांचल राज्य अलग किया जाएगा, शराब बंद किया जाएगा। लेकिन वे मुद्दों से भटकते चले गए। भटकते-भटकते चुनाव भी लड़ लिये।”
इन सब कारणों से पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी है और वे उनसे अलग होने का मन बनाने लगे हैं। कहा कि उनके साथ अब काम नहीं किया जा सकता है।
शशि प्रकाश सिंह ने कहा, “जो लोग दुख और दुर्दिन के साथी रहे, उनको धोखा देना शुरू कर दिया। 2022 का आश्वासन दिया। 2022 में भी वही स्थिति पैदा कर दी। उन्होंने अखिलेश यादव के साथ गठबंधन किया। गठबंधन करने के बाद ताकत बढ़ गई। ताकत बढ़ने के बाद अकड़ बढ़ गई, घमंड में चूर हो गए, अहंकारी हो गए। किसी की बात नहीं सुनना, केवल अपने पुत्रों की बात सुनना। एक का नाम दुर्योधन, दूसरे का नाम दुःशासन और खुद धृतराष्ट्र बन जाना, यानी हस्तिनापुर का राजा बनकर पुत्र दुर्योधन और दुःशासन की बात सुनी।”
इस बीच सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की है। इसकी तस्वीर उनके ट्विटर हैंडल से जारी की गई है। हालांकि तस्वीर के साथ हाल ही में मुलायम सिंह यादव की पत्नी साधना यादव के निधन पर शोक संवेदना जताने की बात कही गई है, लेकिन इस मुलाकात के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।
